Breaking News in Hindi

यमन में बारूदी सुरंगों का खतरा अब भी लोगों पर कायम

दोनों पक्षों के युद्धविराम के बाद भी कम नहीं हुआ यमन का संकट

एजेंसियां

सानाः यमन में लंबे समय से जारी गृहयुद्ध के बाद भले ही सैन्य संघर्षों में कमी आई हो, लेकिन जमीन में दबे खामोश हत्यारे यानी लैंडमाइन्स आज भी निर्दोष जिंदगियों को लील रहे हैं। अगस्त 2023 की एक घटना इस त्रासदी की भयावहता को बयां करती है। मध्य यमन के ताइज़ प्रांत के जबल हबाशी गाँव में 13 वर्षीय इनाया दस्तूर अपनी बकरियाँ चराते हुए स्कूल की किताब पढ़ रही थी।

जैसे ही वह अपनी बकरियों को वापस लाने के लिए आगे बढ़ी, एक जोरदार धमाका हुआ। इनाया एक लैंडमाइन की चपेट में आ गई थी। इस धमाके ने न केवल उसकी दुनिया बदल दी, बल्कि डॉक्टरों को उसकी बाईं टांग काटने पर मजबूर होना पड़ा, जिससे वह उम्र भर के लिए दिव्यांग हो गई।

यह घटना अप्रैल 2022 में हुए युद्धविराम के एक साल बाद की है। सेव द चिल्ड्रन के आंकड़ों के अनुसार, 2022 के युद्धविराम के बाद से अब तक कम से कम 339 बच्चे मारे जा चुके हैं और 843 घायल हुए हैं। रिपोर्ट बताती है कि युद्ध से जुड़ी बच्चों की मौतों में से लगभग आधी मौतें बारूदी सुरंगों और युद्ध के अवशेषों के कारण होती हैं। इनाया कहती हैं, लैंडमाइन्स सोये हुए कातिल हैं, जो किसी मासूम के पैर रखने का इंतजार करते हैं।

इनाया की तरह ही मोहम्मद मुस्तफा ने भी 2018 में ताइज़ के मकबना जिले में अपनी टांग खो दी थी। मात्र 20 वर्ष की आयु में हुए इस हादसे को याद करते हुए वह बताते हैं कि अस्पताल पहुँचने के लिए उन्हें पाँच घंटे का लंबा सफर तय करना पड़ा, जिससे उनकी पीड़ा और बढ़ गई। हालांकि, परिवार के सहयोग से मुस्तफा अब यमन एम्पुटी फुटबॉल महासंघ के सदस्य हैं और एक छोटा व्यवसाय चलाते हैं।

यमन में इन सुरंगों को हटाने का कार्य प्रोजेक्ट मसम (सऊदी अरब द्वारा वित्तपोषित) और डेनिश रिफ्यूजी काउंसिल जैसी संस्थाएं कर रही हैं। मार्च 2026 तक प्रोजेक्ट मसम ने करीब 5,49,452 बारूदी सुरंगों और विस्फोटकों को नष्ट किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानचित्रों की कमी, आधुनिक उपकरणों का अभाव और भीषण बाढ़ के कारण इन सुरंगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर बह जाना, सफाई अभियान को और भी जटिल बना देता है। जब तक यमन पूरी तरह से इन विस्फोटकों से मुक्त नहीं होता, तब तक वहां की मिट्टी में मौत का खतरा बना रहेगा।