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दैत्याकार ऑक्टोपस की एक प्रजाति भी पहले थी

दस करोड़ साल पहले के समुद्र में एक और राजा था

  • जबड़े के जीवाश्म से पता लगाया

  • दो स्थानों से मिले इसके नमूने

  • बीस मीटर तक लंबे होते थे ये

राष्ट्रीय खबर

रांचीः आधुनिक ऑक्टोपस अपनी बुद्धिमत्ता और लचीलेपन के लिए जाने जाते हैं, जो तंग जगहों से निकल जाते हैं या समुद्र की गहराइयों में छिपे रहते हैं। हालांकि, शोध बताते हैं कि उनके पूर्वज बिल्कुल अलग थे। वैज्ञानिकों का मानना है कि शुरुआती ऑक्टोपस शर्मीले नहीं, बल्कि विशालकाय शिकारी थे, जो समुद्री खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर बड़े कशेरुकी जीवों के साथ शिकार करते थे। होक्काइडो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में यह अध्ययन साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

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ऑक्टोपस के मूल का पता लगाना हमेशा कठिन रहा है क्योंकि उनके कोमल शरीर के जीवाश्म बहुत कम मिलते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए, शोधकर्ताओं ने उनके जीवाश्म जबड़ों पर ध्यान केंद्रित किया। हाई-रिजॉल्यूशन ग्राइंडिंग टोमोग्राफी और एआई  मॉडल का उपयोग करते हुए, टीम ने 10 करोड़ से 7.2 करोड़ साल पुराने चट्टानी नमूनों में दबे हुए जबड़ों को खोज निकाला। ये जीवाश्म जापान और वैंकूवर द्वीप से मिले हैं।

विशालकाय आकार और शिकारी व्यवहार अध्ययन से पता चला कि ये विलुप्त ऑक्टोपस सिराटा समूह के थे। होक्काइडो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर यासुहिरो इबा के अनुसार, ये शुरुआती ऑक्टोपस 20 मीटर तक लंबे हो सकते थे, जो उस काल के बड़े समुद्री सरीसृपों से भी विशाल थे। इनके जबड़ों पर घर्षण के निशानों से पता चलता है कि वे बहुत आक्रामक शिकारी थे और अपने मजबूत काट से कठोर शिकार को कुचलने में सक्षम थे। बड़े नमूनों में जबड़े की नोक का 10 फीसद हिस्सा घिस चुका था, जो आधुनिक प्रजातियों की तुलना में कहीं अधिक है।

बुद्धिमत्ता के प्राचीन संकेत यह खोज ऑक्टोपस के इतिहास को करीब 50 लाख साल और पीछे ले जाती है। एक और चौंकाने वाला विवरण जबड़ों के असमान घर्षण से मिला। यह संकेत देता है कि वे जीव अपने जबड़े के एक तरफ का अधिक उपयोग करते थे, जैसा कि उन्नत मस्तिष्क वाले आधुनिक जानवरों में देखा जाता है। इससे संभावना बढ़ती है कि इन प्राचीन ऑक्टोपस में भी जटिल बुद्धिमत्ता मौजूद थी।

खाद्य श्रृंखला की नई समझ सालों से माना जाता रहा है कि प्राचीन समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर केवल कशेरुकी शिकारियों का कब्जा था। यह शोध उस धारणा को चुनौती देता है। यह पहला प्रत्यक्ष प्रमाण है कि रीढ़ की हड्डी के बिना वाले जीव भी विशालकाय और बुद्धिमान एपेक्स प्रीडेटर (शीर्ष शिकारी) के रूप में विकसित हो सकते थे।

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