Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
EVM में टोटलाइजर से क्यों नहीं हो सकती वोटों की गिनती?: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से मां... किशनगंज: खकवा नदी के तेज बहाव में तैरकर जनाजा ले जाने की मजबूरी, ग्रामीणों ने डीएम और बिहार सरकार से... शिवपुरी में रहस्यमयी बीमारी का कहर: 10 दिनों में एक ही परिवार के 4 बच्चों की मौत, डेंगू-मलेरिया निगे... भारतीय मुसलमानों के अधिकारों के लिए 51 सदस्यीय राष्ट्रीय निगरानी समिति का गठन: नई दिल्ली में ऐलान अफगानिस्तान टी20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान: श्रेयस अय्यर बने कप्तान, युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी... 'सैयारा' फेम अनीत पड्डा की नई सीरीज 'हुंकार: द रोर' का टीजर रिलीज: जानें कहानी, स्टार कास्ट और OTT र... नेपाल में 180 km/h की रफ्तार से आई 'हिमालयी सुनामी': रसुवा-धाडिंग में भारी तबाही, सुरंगों में बचाव क... LIC के दो नए धमाकेदार प्लान: गारंटीड सेविंग्स के साथ मिलेगा प्योर लाइफ कवर, 7 सितंबर से शुरू होगी बि... UPI का नया रिकॉर्ड: अगस्त में ₹29.82 लाख करोड़ का लेनदेन, कुल 2,451 करोड़ ट्रांजेक्शन दर्ज; NPCI ने ... श्रीकृष्ण के सबसे प्रिय भोग माखन-मिश्री और पंचामृत की विधि; जानें मलाई से शुद्ध माखन बनाने का आसान न...

केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट को पत्र के माध्यम से बताया

न खुद ना वकील के जरिए पेश होऊंगा

  • जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को लिखा

  • निष्पक्षता पर भरोसा नहीं रह गया है

  • सुप्रीम कोर्ट में भी अब अपील करेंगे

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को एक पत्र लिखकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह आबकारी मामले में उनके समक्ष न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही अपने वकील के माध्यम से उपस्थित होंगे। सोमवार को पार्टी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, केजरीवाल ने यह निर्णय अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने के बाद लिया है।

न्यायाधीश को संबोधित अपने विस्तृत पत्र में केजरीवाल ने कहा कि उनका यह फैसला किसी क्रोध या अनादर की भावना से नहीं, बल्कि विनम्रता, पीड़ा और न्यायपालिका की भूमिका में अटूट विश्वास के साथ लिया गया है। उन्होंने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि यह मुद्दा न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता में आम नागरिकों के विश्वास से जुड़ा है।

यह नाटकीय घटनाक्रम तब सामने आया है जब 20 अप्रैल को उच्च न्यायालय ने जस्टिस शर्मा को इस मामले की सुनवाई से हटाने (रिक्यूसल) की केजरीवाल की याचिका को खारिज कर दिया था। उस आदेश का उल्लेख करते हुए केजरीवाल ने लिखा कि उनकी तार्किक आशंकाएं दूर नहीं हुई हैं। उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि उनकी चिंताओं को व्यक्तिगत हमले और संस्था पर प्रहार के रूप में देखा गया, जिससे अब उन्हें इस अदालत में निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं रही।

महात्मा गांधी और सत्याग्रह के सिद्धांतों का आह्वान करते हुए आप नेता ने कहा कि यह कार्रवाई आत्म-चिंतन और परिणामों को सहने की इच्छा का परिणाम है। उन्होंने पहले उठाई गई चिंताओं को दोहराते हुए कहा कि न्यायाधीश का अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद जैसे संगठनों के कार्यक्रमों में शामिल होना, जो सत्ताधारी दल के वैचारिक पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं, निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।

केजरीवाल ने एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए हितों के टकराव का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि न्यायाधीश के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में वकील हैं, जबकि इस मामले में सीबीआई दूसरी पक्षकार है। उन्होंने आरटीआई के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी पैनल में होने के कारण भारी मात्रा में केस मिलने से महत्वपूर्ण पेशेवर पारिश्रमिक प्राप्त होता है, जो निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।

अंत में, केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि यद्यपि वह इस मामले की कार्यवाही से खुद को अलग कर रहे हैं, लेकिन उनका भारतीय संविधान और न्यायपालिका में सम्मान बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि वह जस्टिस शर्मा के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।