हिमंता के परिवार का मामला अब भी उलझा हुआ
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गुवाहाटी हाईकोर्ट ने नामंजूर कर दिया
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पासपोर्ट और विदेशी निवेश का आरोप
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सिंघवी ने कहा राजनीतिक मामला है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने रविवार को गुवाहाटी उच्च न्यायालय के उस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के खिलाफ की गई उनकी कथित टिप्पणियों से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, खेड़ा की ओर से स्पेशल लीव पिटीशन दर्ज की गई है, जिसका डायरी नंबर 25523/2026 है। वर्तमान में यह याचिका लंबित श्रेणी में है।
गुवाहाटी उच्च न्यायालय का फैसला और दलीलें दो दिन पहले, गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पार्थिवज्योति सैकिया की एकल पीठ ने खेड़ा को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि यह मामला केवल मानहानि का नहीं है। अदालत ने माना कि भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 339 के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है और आरोपी अग्रिम जमानत के विशेषाधिकार का पात्र नहीं है। सुनवाई के दौरान खेड़ा के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है और आगामी राज्य चुनावों के मद्देनजर निष्पक्षता पर सवाल उठाता है। सिंघवी ने कहा कि खेड़ा के देश छोड़कर भागने का कोई खतरा नहीं है और हिरासत में लेकर पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है।
दूसरी ओर, असम के महाधिवक्ता देवजीत लोन सैकिया ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला मानहानि से कहीं अधिक गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में धोखाधड़ी, दस्तावेजों के फर्जीवाड़े और टाइटल डीड की जालसाजी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं, इसलिए हिरासत में लेकर जांच जरूरी है।
सारा विवाद पवन खेड़ा द्वारा लगाए गए उन आरोपों से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई विदेशी पासपोर्ट, विदेशों में अघोषित विलासी संपत्तियां और मुखौटा कंपनियों के साथ संबंध हैं। गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में दर्ज FIR में फर्जी बयान, धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराएं लगाई गई हैं। इस महीने की शुरुआत में असम पुलिस ने दिल्ली में खेड़ा के आवास पर तलाशी भी ली थी।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर खेड़ा के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे धमकी और उत्पीड़न की राजनीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जीत हासिल करेंगे। इससे पहले खेड़ा को तेलंगाना उच्च न्यायालय से मिली अंतरिम राहत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी, जिसके बाद उन्हें गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाना पड़ा था।