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मुझे इस्तीफा पर विचार करने को कहाःसाहनी

केजरीवाल से अपनी मुलाकात पर आप के पूर्व सांसद का खुलासा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने वाले सात राज्यसभा सांसदों में से एक, प्रसिद्ध उद्योगपति और परोपकारी विक्रमजीत सिंह साहनी ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। साहनी ने बताया कि भाजपा के साथ विलय की औपचारिक घोषणा से कुछ दिन पहले उन्होंने आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी। साहनी के अनुसार, बुधवार 22 अप्रैल 2026 को हुई इस मुलाकात में केजरीवाल ने उनसे पूछा था कि क्या वे किसी दबाव में हैं, और उन्हें राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने का सुझाव भी दिया था।

साहनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्पष्ट किया कि उनके और केजरीवाल के बीच हुई मुलाकात को लेकर जो भ्रामक विमर्श चलाया जा रहा है, वह गलत है। उन्होंने लिखा, केजरीवाल ने मुझे बुधवार को बैठक के लिए बुलाया था। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं किसी दबाव में हूँ, जिस पर मैंने स्पष्ट रूप से नहीं कहा। फिर उन्होंने सुझाव दिया कि मुझे अपनी सांसद सदस्यता से इस्तीफा देने पर विचार करना चाहिए, जिस पर मैंने कहा कि मैं इस बारे में सोचूँगा—बस इतनी ही बात हुई थी। साहनी ने बताया कि उन्हें शुक्रवार को दोबारा मिलना था, लेकिन उससे पहले ही दिल्ली में बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस हो गई और समीकरण बदल गए।

विक्रमजीत साहनी के अलावा, राघव चड्ढा, राजिंदर गुप्ता, संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल और हरभजन सिंह सहित सात सांसदों ने आप छोड़कर भाजपा के साथ विलय कर लिया है। इस कदम के बाद आप नेतृत्व ने इन सांसदों को गद्दार करार दिया और कहा कि उन्होंने पंजाब की जनता के साथ विश्वासघात किया है। वहीं, राघव चड्ढा ने पलटवार करते हुए खुद को गलत पार्टी में सही व्यक्ति बताया और कहा कि वे पार्टी के अपराधों का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। साहनी ने कहा कि चड्ढा और संदीप पाठक जैसे नेता पिछले दो वर्षों से खुद को दरकिनार किए जाने के कारण हताश थे।

साहनी के अनुसार, 2022 के पंजाब चुनावों में ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले संदीप पाठक और राघव चड्ढा को पिछले कुछ समय से हाशिए पर धकेल दिया गया था, जिससे असंतोष पनपा। साहनी ने केजरीवाल को यह भी संकेत दिया था कि यदि एक-दो सांसद इस्तीफा भी दे देते हैं, तब भी शेष पांच सांसदों के साथ मिलकर दो-तिहाई का जादुई आंकड़ा (जो दलबदल कानून से बचने के लिए जरूरी है) आसानी से हासिल किया जा सकता है। फिलहाल अरविंद केजरीवाल या पार्टी के अन्य शीर्ष नेताओं ने साहनी के इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन इस घटनाक्रम ने दिल्ली और पंजाब की राजनीति में भूचाल ला दिया है।