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हर कर्मचारी को वोट देने का मौका मिलेगा

बंगाल के सरकारी कर्मचारियों से डर गया चुनाव आयोग

  • ट्रेनिंग के दौरान यह मुद्दा उठा था

  • अपने मतदान पर अड़ गये थे लोग

  • आनन फानन में इसकी घोषणा हुई

राष्ट्रीय खबर

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदान कार्यों में लगे सरकारी कर्मियों के मताधिकार को लेकर उपजे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मी को अपने लोकतांत्रिक अधिकार के प्रयोग से वंचित नहीं किया जाएगा। गुरुवार को राज्य के विभिन्न जिलों से खबरें आई थीं कि अंतिम प्रशिक्षण के दिन कई मतदान कर्मी विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से अपना पोस्टल बैलट जमा नहीं कर पाए। इस स्थिति को लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए कई संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद आयोग ने शुक्रवार को स्थिति स्पष्ट की।

अव्यवस्था और शिकायतें विभिन्न शिक्षक संगठनों और मतदान कर्मी मंचों ने आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिक्षानुरागी ऐक्य मंच और बीएलओ ऐक्य मंच के अनुसार, पश्चिम वर्धमान के दुर्गापुर स्थित एक निजी स्कूल में मतदान प्रक्रिया के दौरान भारी अव्यवस्था देखी गई। आरोप है कि एक छोटे से कमरे में तीन विधानसभा क्षेत्रों के कर्मियों को इकट्ठा कर दिया गया, जिससे तंग आकर कई लोग बिना वोट दिए ही लौट गए। इसी तरह पश्चिम मेदिनीपुर के बसंतपुर में मतदाता सूची में नाम न होने के कारण कई कर्मी मतदान नहीं कर सके।

विवाद बढ़ता देख चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, किसी को भी मताधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। जो कर्मी प्रशिक्षण के आखिरी दिन वोट नहीं दे पाए हैं, उनके लिए कानूनी रूप से अलग व्यवस्था मौजूद है। आयोग ने स्पष्ट किया कि 16 अप्रैल को चूक गए कर्मी अब 20 से 22 अप्रैल के बीच अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। इसके लिए जिलाधिकारियों के माध्यम से अधिसूचनाएं जारी की जा रही हैं।

हालांकि, आयोग द्वारा दी गई 22 अप्रैल की तारीख पर मतदान कर्मियों ने आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान है, जिसके लिए उन्हें एक दिन पहले यानी 22 अप्रैल को ही अपने आवंटित मतदान केंद्रों के लिए रवाना होना होगा। ऐसे में उसी दिन वोट डालना उनके लिए व्यावहारिक रूप से असंभव होगा। संगठनों ने आरोप लगाया है कि सरकार समर्थक अधिकारी जानबूझकर ऐसी बाधाएं उत्पन्न कर रहे हैं। कर्मचारी नेताओं का सवाल है कि क्या आयोग मतदान कर्मियों के लिए सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं है? आयोग ने फिलहाल सभी जिलों को समन्वय बिठाने का निर्देश दिया है।