Breaking News in Hindi

महिला आरक्षण बिल पर नया दांव खेल गये प्रधानमंत्री

महिलाओं से दबाव बनाने का किया आह्वान

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले लोकसभा चुनावों से महिला आरक्षण कानून लागू करने के सरकार के कदम पर शनिवार को अपनी पहली टिप्पणी की। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे विपक्ष पर दबाव बनाएं ताकि संबंधित विधेयकों को संसद में निर्विरोध पारित किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने उन आरोपों को झूठ बताकर खारिज कर दिया कि जनसंख्या नियंत्रण में सफलता के कारण परिसीमन में दक्षिणी राज्यों को सीटों का नुकसान होगा।

केरल के तिरुवल्ला में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद का बजट सत्र 16 अप्रैल से तीन दिनों के लिए फिर से शुरू होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उनकी सरकार द्वारा अधिनियमित लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसद आरक्षण का कानून 2029 के लोकसभा चुनावों से प्रभावी हो जाए। मोदी ने यह भी पुष्टि की कि महिला आरक्षण के लिए सीटों की संख्या बढ़ाने हेतु परिसीमन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, लोग यह झूठ फैला रहे हैं कि जहां जनसंख्या घट रही है, वहां सीटें कम हो जाएंगी। हम संसद की मुहर वाला एक ऐसा कानून चाहते हैं जो यह सुनिश्चित करे कि केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गोवा या तेलंगाना में लोकसभा की सीटें कम न हों। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में इन राज्यों द्वारा किए गए बेहतर कार्यों की सराहना की।

सरकार का प्रस्ताव विधायिकाओं में सीटों की संख्या में लगभग 50 फीसद की वृद्धि करने का है। इसके तहत लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती है, ताकि बढ़ी हुई अतिरिक्त सीटें विशेष रूप से महिलाओं के लिए आवंटित की जा सकें। हालांकि, प्रधानमंत्री ने सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया।

उन्होंने केरल के मतदाताओं से कहा, आपको कांग्रेस और एलडीएफ के सदस्यों से कहना चाहिए कि इन कानूनों को निर्विरोध पारित किया जाना चाहिए। महिलाओं को सभी राजनीतिक दलों पर दबाव बनाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, हमारी माताओं और बहनों का यह अधिकार 40 वर्षों से लंबित है। 2029 के चुनावों में ऐसा नहीं रहना चाहिए।

मोदी ने उल्लेख किया कि उनकी सरकार ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को बैठक के लिए बुलाया था और इंडिया गठबंधन के दलों से भी बात की है। गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में हुई इस बैठक में कुछ विपक्षी दल शामिल हुए, लेकिन कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दल इससे दूर रहे। कांग्रेस और वामपंथियों ने सर्वदलीय बैठक की मांग की है।