केंद्र सरकार का नाम बदलने का खेल जारी है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः केंद्र सरकार ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका सुरक्षा प्रदान करने वाली प्रमुख योजना, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), के नाम में एक महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दे दी है। अब मनरेगा को पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के नाम से जाना जाएगा।
यह नाम परिवर्तन भारतीय राजनीति और सरकारी योजनाओं में विचारधारात्मक बदलाव का संकेत देता है, हालांकि योजना के मूल उद्देश्यों और संरचना में बड़ा परिवर्तन अपेक्षित नहीं है। नाम बदलने का यह फैसला महात्मा गांधी के आदर्शों को और अधिक स्पष्ट रूप से योजना से जोड़ने के सरकारी इरादे को दर्शाता है, जिसे पहले से ही उनके नाम पर चलाया जा रहा था।
नाम परिवर्तन के साथ ही, केंद्र सरकार ने ग्रामीण आबादी को राहत प्रदान करने वाला एक और बड़ा निर्णय लिया है। योजना के तहत प्रति परिवार और प्रति वर्ष गारंटीकृत कार्य दिवसों की संख्या को 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है।
यह वृद्धि ग्रामीण परिवारों की क्रय शक्ति और वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने में सहायक होगी, खासकर ऐसे समय में जब ग्रामीण अर्थव्यवस्था मौसमी उतार-चढ़ाव और कृषि पर निर्भरता के कारण चुनौतियों का सामना कर रही है। कार्य दिवसों में वृद्धि से मजदूरों को अधिक आय प्राप्त होगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन और जीवन स्तर में सुधार की गति तेज़ होने की उम्मीद है।
मनरेगा, जिसे 2005 में लॉन्च किया गया था, दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा और रोजगार कार्यक्रमों में से एक है। यह योजना ग्रामीण श्रमिकों को कानूनी रूप से न्यूनतम मजदूरी पर काम का अधिकार सुनिश्चित करती है।
हालांकि, नाम और कार्य दिवसों में बदलाव के बाद, इसके वित्तीय प्रबंधन और राज्यों द्वारा इसके कार्यान्वयन की निगरानी में केंद्र की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। विपक्षी दल इस नाम परिवर्तन पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं, क्योंकि मनरेगा हमेशा राजनीतिक बहस का एक केंद्रीय विषय रहा है। सरकार का यह कदम महात्मा गांधी की विरासत को ग्रामीण विकास के साथ और गहराई से जोड़ता है।