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एमईएस के दो अफसर गिरफ्तार किये गये

रक्षा विभाग के भ्रष्टाचार की एक और कलई खुल गयी

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः पुणे के खड़की स्थित मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दो वरिष्ठ सैन्य इंजीनियरिंग अधिकारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई न केवल रक्षा विभाग के भीतर मौजूद भ्रष्टाचार की जड़ों को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकारी मशीनरी में भुगतान रोकने के बदले अवैध वसूली का धंधा किस तरह फल-फूल रहा है।

यह घटना 3 फरवरी 2026 को आधिकारिक तौर पर दर्ज की गई थी, जब एक निजी निर्माण कंपनी के प्रतिनिधि ने सीबीआई से संपर्क किया। शिकायतकर्ता, जो एक पावर ऑफ अटॉर्नी धारक के रूप में एमईएस के तहत विभिन्न ठेकों का प्रबंधन कर रहा था, ने आरोप लगाया कि उसके द्वारा किए गए कार्यों का भुगतान जानबूझकर लटकाया जा रहा है। आरोपियों ने काम पूरा होने और सभी आवश्यक पूर्णता प्रमाणपत्रजमा किए जाने के बावजूद बिलों को आगे बढ़ाने के बदले ₹6 लाख की भारी-भरकम घूस मांगी थी।

आरोपियों की पहचान सुनील निकम, जो असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर के पद पर तैनात हैं, और सुरेश म्हस्के, जो जूनियर इंजीनियर हैं, के रूप में हुई है। सीबीआई के अनुसार, इन अधिकारियों ने ठेकेदार पर इतना दबाव बनाया कि वह बातचीत करने को मजबूर हो गया। अंततः, रिश्वत की पहली किस्त के रूप में ₹2 लाख देने पर सहमति बनी।

सीबीआई की एंटी-करप्शन यूनिट ने 5 फरवरी 2026 को एक रणनीतिक जाल बिछाया। जैसे ही जूनियर इंजीनियर सुरेश म्हस्के ने अपने कार्यालय में शिकायतकर्ता से ₹2 लाख की नकदी स्वीकार की, पहले से तैनात सीबीआई की टीम ने उसे दबोच लिया। रिश्वत की रकम मौके पर ही बरामद कर ली गई।

इस साजिश में सुनील निकम की सीधी संलिप्तता पाए जाने के बाद उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए दोनों आरोपियों के कार्यालयों और आवासीय परिसरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इन तलाशी अभियानों के दौरान जांच टीम को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं जो इस भ्रष्टाचार की कड़ी को जोड़ते हैं।

इसके अतिरिक्त, आरोपियों के आवास से ₹1,88,500 की संदिग्ध नकदी भी बरामद की गई है, जिसका वे कोई संतोषजनक हिसाब नहीं दे सके। सीबीआई अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इन अधिकारियों ने पूर्व में भी अन्य ठेकेदारों से इसी तरह की वसूली की है। वर्तमान में, दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और सीबीआई उनसे पूछताछ कर रही है।