बैंक की तिजोरी में जाली नोट भरे होने का मामला
राष्ट्रीय खबर
चंडीगढ़ः अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मंगलवार को एक बड़े जाली नोट रैकेट के सिलसिले में सहारनपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के एक प्रबंधक को गिरफ्तार किया है। बैंक में करेंसी चेस्ट मैनेजर के पद पर तैनात अमित कुमार को चंडीगढ़ में उसके साले के घर से खोज निकाला गया और 7 सितंबर को हिरासत में ले लिया गया।
एनआईए द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, यह गिरफ्तारी सदर बाजार पुलिस द्वारा 26 अगस्त को सहारनपुर में बैंक की करेंसी चेस्ट से 17.29 करोड़ रुपये के जाली भारतीय नोट बरामद किए जाने के बाद हुई है। मामला दर्ज होने के बाद से ही आरोपी कुमार फरार चल रहा था। इस सिलसिले में पहली एफआईआर (संख्या 0431/2026) उसी दिन सदर बाजार पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 178 के तहत दर्ज की गई थी।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और पीएनबी की टीमों द्वारा शुरुआती जांच और उसके बाद किए गए पूर्ण ऑडिट में 500 रुपये के भारी मात्रा में जाली नोट बरामद हुए। इस पूरे मामले की शुरुआत आरबीआई के जयपुर कार्यालय को भेजे गए एक प्रेषण में नकदी की कमी से हुई थी, लेकिन जल्द ही यह एक बहुत बड़े खुलासे में बदल गई।
पहले अधिकारियों को लगभग 7.4 करोड़ रुपये के संदिग्ध जाली नोट मिले, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती गई, कुल रकम बढ़कर 17.29 करोड़ रुपये हो गई। जांचकर्ताओं का मानना है कि समय के साथ असली नोटों को निकालकर उनकी जगह जाली नोट रखे गए होंगे।
आरंभिक जांच में यह संकेत मिला था कि इस फर्जीवाड़े में पीएनबी के तीन कर्मचारी शामिल थे। कुमार के अलावा इस समूह में सीनियर डिवीजनल मैनेजर रवि कुमार कंसे और सहारनपुर करेंसी चेस्ट के प्रबंधक सुशील कुमार शामिल हैं, जिनका नाम रिकॉर्ड में सुशील शर्मा भी दर्ज है। बैंक ने इन तीनों कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।
बरामद जाली मुद्रा की भारी मात्रा और इसमें किसी बड़े सिंडिकेट के शामिल होने की आशंका को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले की जांच एनआईए को सौंप दी। एजेंसी ने 3 सितंबर को अपनी लखनऊ शाखा में मामला आरसी-02/2026/एनआईए/एलकेडब्ल्यू के तहत फिर से दर्ज किया। जांच के दौरान मिले सीसीटीवी फुटेज से यह बात सामने आई कि एक पार्ट-टाइम हाउसकीपर करेंसी चेस्ट के अंदर नोटों के बंडलों से नकदी निकाल रहा था, जिससे अंदरूनी लोगों की मिलीभगत का संदेह और गहरा गया है।
एनआईए ने निलंबित अधिकारियों के घरों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त कर लिए हैं और अब उनकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड व आवाजाही के पैटर्न की जांच की जा रही है। एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि अब उनका पूरा ध्यान यह पता लगाने पर है कि जाली नोट कहां से आए, उन्हें सुरक्षित करेंसी चेस्ट के अंदर कैसे पहुंचाया गया, असली नकदी कहां गई और इस रैकेट में सीमा पार के संपर्कों सहित अन्य कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।