तीन इलाके अलग होने की तैयारी में जुटे
लंदनः स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के शीर्ष क्षेत्रीय नेता यूनाइटेड किंगडम (यूके) के विघटन की पूरी प्रक्रिया को बेहद तेजी से आगे बढ़ाने और उसे अमलीजामा पहनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए सोमवार को आपस में आमने-सामने की बैठक कर रहे हैं।
इन तीनों क्षेत्रों के प्रमुख नेताओं का यह अनूठा और सामरिक जमावड़ा ब्रिटिश राजनीतिक इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण, निर्णायक और दूरगामी मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि यह सीधा कदम सीधे तौर पर ब्रिटेन की सदियों पुरानी अखंडता और इसके मौजूदा संवैधानिक ढांचे को एक गंभीर चुनौती पेश करता है।
लंबे समय से इन तमाम क्षेत्रों के भीतर लंदन की केंद्रीय सत्ता से पूरी तरह स्वतंत्र होने, अपनी राजनीतिक हैसियत बढ़ाने या फिर अपनी प्रशासनिक स्वायत्तता को और अधिक मजबूत करने की प्रबल मांगें लगातार उठती रही हैं, और यह नया राजनीतिक समझौता इसी दिशा में उठाया गया एक बेहद ठोस और आक्रामक कदम माना जा रहा है।
इस ऐतिहासिक और उच्च स्तरीय बैठक के दौरान, ये सभी क्षेत्रीय नेता आपसी सहयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के साथ-साथ यूके के संघ से कानूनी और राजनीतिक रूप से अलग होने की एक स्पष्ट रूपरेखा तैयार करने पर अत्यंत विस्तार से चर्चा करेंगे। स्कॉटिश नेशनल पार्टी और अन्य प्रमुख राष्ट्रवादी गुटों की लंबे समय से अटूट मंशा रही है कि वे स्कॉटलैंड को एक पूर्ण रूप से स्वतंत्र देश के रूप में अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित करें, जबकि दूसरी ओर वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के भीतर भी लगातार बदलती हुई भू-राजनीतिक और आंतरिक राजनीतिक परिस्थितियों के बीच यूनाइटेड किंगडम के भविष्य को लेकर बहस बेहद तेज हो गई है।
विशेष रूप से ब्रेक्जिट के बाद से इन तमाम क्षेत्रों में लंदन स्थित केंद्रीय सरकार के प्रति रोष और असंतोष लगातार काफी बढ़ा है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण मामलों में क्षेत्रीय प्राथमिकताओं और जनहित की अनदेखी किए जाने के गंभीर आरोप लगातार लगते रहे हैं। इस प्रकार, इन तीनों क्षेत्रों का एक साझा मंच पर एक साथ आना और यूनाइटेड किंगडम के विघटन के लिए एक संयुक्त रणनीति तैयार करना ब्रिटिश प्रधानमंत्री और उनकी केंद्रीय सरकार के लिए आने वाले दिनों में एक गहरा और विकट राजनीतिक संकट पैदा कर सकता है। यह उभरता हुआ समझौता ब्रिटेन के राजनीतिक और भौगोलिक मानचित्र को हमेशा के लिए पूरी तरह से बदलने की पूरी क्षमता रखता है, जिससे स्वयं ब्रिटिश संघ के भविष्य और उसके दीर्घकालिक अस्तित्व पर ही एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है।