Breaking News in Hindi

सऊदी के अरामको पर फिर से हमला किया गया

अमेरिकी पेट्रियॉट की तैनाती के बाद हूतियों ने दावा किया

कई इलाकों से हमला कर रहे हैं हूती

सऊदी ने भी उनपर हवाई हमले किये

हमले से परिसर में आग लग गयी

रियाधः यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित प्रतिष्ठित अरामको तेल सुविधा को निशाना बनाए जाने की यह घटना मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक नया और चिंताजनक मोड़ लाती है। शनिवार को सामने आए इन घटनाक्रमों ने एक बार फिर इस क्षेत्र में सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विद्रोहियों की ओर से जारी आधिकारिक बयानों में यह दावा किया गया है कि यह हमला पूरी तरह से जवाबी कार्रवाई के रूप में किया गया है, जिसके तहत यमन की राजधानी सना और अन्य प्रांतों पर लगातार हो रहे सऊदी हवाई हमलों का कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है। हूती गुटों का तर्क है कि जब तक उनके क्षेत्रों पर सैन्य कार्रवाई बंद नहीं होती, तब तक वे सामरिक और आर्थिक ठिकानों को इसी प्रकार निशाना बनाते रहेंगे।

घटनास्थल से सामने आए दृश्यों और चश्मदीदों के बयानों ने इस हमले की गंभीरता को और अधिक स्पष्ट कर दिया है। एक प्रमुख गवाह के अनुसार, शनिवार की सुबह रियाद में स्थित अरामको सुविधा के आसपास के इलाके में आसमान में धुएं और आग का एक विशाल गुबार उठता हुआ साफ देखा गया, जिससे स्थानीय निवासियों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

हालांकि, इन प्रत्यक्षदर्शियों के दावों और हूतियों की घोषणाओं के बावजूद, सऊदी अरब के आधिकारिक प्रशासन या सुरक्षा तंत्र की तरफ से इस हमले पर तुरंत कोई पुष्टि नहीं की गई है। इसके अलावा, दुनिया की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनियों में शुमार सऊदी अरामको की ओर से भी मीडिया के इन सवालों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, जिससे स्थिति को लेकर कयासों का दौर और अधिक तेज हो गया है।

यह ताजा हमला ऐसे समय में हुआ है जब सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। पिछले कुछ महीनों में हूतियों ने सऊदी अरब के प्रमुख शहरों, रिहायशी इलाकों और संवेदनशील ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर अपने हमलों की आवृत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

इस रणनीतिक आक्रामकता का एक और उदाहरण पिछले सप्ताह देखने को मिला था, जब हूती विद्रोहियों ने देश के पश्चिमी तट पर स्थित यानबू शहर में सऊदी अरामको की सुविधाओं पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमला करने का दावा किया था। हालांकि, उस समय सऊदी रक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ताइफ और यानबू क्षेत्र की ओर दागी गई कम से कम छह बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नाकाम करने और रोकने का दावा किया था।

उस दौरान भी सऊदी अधिकारियों ने ऊर्जा प्रतिष्ठानों को किसी भी तरह के बड़े नुकसान से इनकार किया था, लेकिन बार-बार हो रहे ऐसे सुरक्षा उल्लंघनों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों और क्षेत्रीय स्थिरता के संरक्षकों की नींद उड़ा दी है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यमन का यह संघर्ष न केवल स्थानीय स्तर पर विनाशकारी है, बल्कि इसकी आंच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकती है, जिससे पूरी दुनिया की निगाहें इस क्षेत्र के घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।