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कांग्रेस ने चीन सीमा तनाव पर मांगे जवाब

अरुणाचल प्रदेश में आईटीबीपी के प्रमुख के बयान पर राजनीति

आईटीबीपी के प्रमुख ने दिया है बयान

ख़डगे ने एक्स पर अपना बयान डाला

राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी ले सरकार

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः आईटीबीपी महानिदेशक शत्रुजीत कपूर द्वारा अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ हुई झड़पों पर दिए गए बयान के बाद कांग्रेस ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से भारत-चीन सीमा की स्थिति पर स्पष्टीकरण की मांग की। पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या भारतीय सैनिकों की अपने पुराने गश्त (पेट्रोलिंग) क्षेत्रों तक पहुंच बरकरार है और बीजिंग के प्रति अपनी हालिया नीतियों से भारत ने क्या हासिल किया है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद और जनता को विश्वास में लेने का आग्रह किया। खरगे ने सरकार से चीन को क्लीन चिट देना बंद करने को कहा और राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा तथा कूटनीतिक जवाबदेही पर जवाब मांगे। अगस्त में तक्सिंग के पास चीनी घुसपैठ की रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या वाचा-दमाई में कोर कमांडर स्तर की वार्ता के बावजूद तनाव बना हुआ है। उन्होंने दोहराया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और सरकार को इस विषय पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

इसके अतिरिक्त, खरगे ने चीन पर बढ़ती आर्थिक निर्भरता पर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि 2020-21 के बाद से चीन से आयात में 102 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और द्विपक्षीय व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। सशस्त्र बलों पर पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सरकारी जवाबदेही आवश्यक है।

नई दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय में एक अलग संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने पूछा कि क्या भारतीय बल अप्रैल 2020 से पहले वाले सभी स्थानों पर गश्त करने में सक्षम हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेस नोट 3 में ढील, यात्रा प्रतिबंधों में छूट, चीनी श्रमिकों के लिए अधिक वीजा और बढ़ते व्यापार घाटे के माध्यम से सरकार की नीतियां भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को नुकसान पहुंचा रही हैं। इसके साथ ही कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भी आईटीबीपी के जवानों की सराहना करते हुए सीमा की स्थिति पर प्रधानमंत्री और उनके प्रशासन की चुप्पी की आलोचना की।