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मछली के तेल से अल्जाइमर का खतरा कम नहीं होता

दो साल के शोध ने बताया इसका कोई लाभ नहीं

लाखों लोग इसका प्रयोग करते आये हैं

हिप्पोकैम्प्स पर कोई असर नहीं डालत

सप्लीमेंट के बदले संतुलित जीवन अच्छा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः मस्तिष्क को स्वस्थ रखने और याददाश्त बेहतर करने की उम्मीद में लाखों लोग फिश ऑयल (मछली के तेल) के सप्लीमेंट्स लेते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड वाले इन सप्लीमेंट्स का कारोबार अरबों डॉलर तक पहुंच चुका है, क्योंकि ये पोषक तत्व दिमागी कोशिकाओं के जुड़ाव को बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं। हालांकि, एक नए अध्ययन से पता चला है कि सप्लीमेंट्स के जरिए दिमाग तक ओमेगा-3 पहुंचाने से वह सुरक्षा नहीं मिलती जिसकी लोग उम्मीद करते हैं।

केक मेडिसिन ऑफ यूएससी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि ओमेगा-3 की उच्च खुराक दिमाग तक पहुंचने के बावजूद, इसने याददाश्त या सोचने की क्षमता में कोई सुधार नहीं दिखाया और न ही यह दिमाग को सिकुड़ने से रोक सका।

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ईबायोमेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित यह निष्कर्ष दो साल के क्लिनिकल ट्रायल पर आधारित हैं। इसमें 55 से 80 वर्ष की आयु के 365 बुजुर्ग शामिल थे, जिन्हें अल्जाइमर रोग का उच्च जोखिम था। प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटा गया था—एक समूह को रोजाना 2,000 मिलीग्राम डीएचए (ओमेगा-3 फैटी एसिड) का सप्लीमेंट दिया गया, जबकि दूसरे समूह को प्लासिबो (निष्क्रिय खुराक) दी गई।

छह महीने बाद, सप्लीमेंट लेने वालों के मस्तिष्क-रीढ़ के तरल पदार्थ (सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड) में डीएचए का स्तर 17 फीसद बढ़ गया, जिससे स्पष्ट हुआ कि ओमेगा-3 दिमाग तक पहुंच रहा है। लेकिन दो साल बाद जब परीक्षण किए गए, तो सप्लीमेंट लेने वाले बुजुर्गों का प्रदर्शन प्लासिबो लेने वालों से बेहतर नहीं था। एमआरआई स्कैन में भी पाया गया कि यह सप्लीमेंट याददाश्त के मुख्य केंद्र हिप्पोकैम्पस को सिकुड़ने से रोकने में असमर्थ रहा।

अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता डॉ. हुसैन नाजी यासीन ने कहा, हम सभी चाहते हैं कि अल्जाइमर से बचाव का कोई रामबाण इलाज मिले, लेकिन हमारे परिणाम बताते हैं कि फिश ऑयल सप्लीमेंट्स दिमाग को सुरक्षा नहीं देते। हालांकि ओमेगा-3 दिमाग के लिए जरूरी है, पर सप्लीमेंट के रूप में इसे अल्जाइमर से बचाव का उपाय नहीं माना जा सकता।

शोधकर्ताओं का मानना है कि ओमेगा-3 सप्लीमेंट के बजाय संतुलित भोजन (जैसे भूमध्यसागरीय आहार या मेडिटेरेनियन डाइट) के जरिए लिया जाए, तो यह ज्यादा प्रभावी हो सकता है। अंत में विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसी एक सप्लीमेंट पर निर्भर रहने के बजाय नियमित व्यायाम, अच्छी नींद और पौष्टिक आहार जैसी स्वस्थ आदतें ही अल्जाइमर के खतरे को कम करने का सबसे असरदार तरीका हैं।

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