बलूचिस्तान के चागाई में फिर सेना और विद्रोहियों की झड़प
क्वेटाः बलूच लिबरेशन आर्मी के प्रवक्ता आजाद बलूच ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि 18 अक्टूबर को चागाई जिले के दोगानान इलाके में एक लंबी झड़प के दौरान 10 पाकिस्तानी सैन्यकर्मी मारे गए। समूह ने यह भी बताया कि बलूच मातृभूमि के लिए उसके दो बहादुर लड़ाकों ने अपनी जान कुर्बान कर दी। बीएलए के बयान के अनुसार, यह मुठभेड़ सुबह लगभग 6 बजे शुरू हुई और शाम लगभग 7 बजे तक यानी करीब 13 घंटे तक जारी रही। बीएलए ने कहा कि पाकिस्तानी सैन्य बलों ने उनके ठिकानों पर हमला किया, जिसके जवाब में उनके लड़ाकों ने अपने ठिकानों और आसपास के नागरिक समुदायों की रक्षा करते हुए हल्के और भारी हथियारों से जवाबी गोलीबारी की।
समूह ने आगे कहा कि इस मुठभेड़ के दौरान पाकिस्तानी बलों को भारी जनधन का नुकसान हुआ, जिसके बाद उन्होंने हवाई सहायता बुलाई। बयान में इस बात पर भी जोर दिया गया कि लड़ाई के दौरान सेना ने तोपखाने, लंबी दूरी के मोर्टार और ड्रोन का इस्तेमाल किया। बीएलए ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तानी बलों ने नागरिक आबादी वाले इलाकों में अंधाधुंध गोलाबारी की। समूह ने झड़प में शहीद हुए अपने दो लड़ाकों की पहचान जावेद उर्फ मलंग और कमाल खान उर्फ सद्दाम बलूच के रूप में की है।
बयान के मुताबिक, असाधारण वीरता से लड़ते हुए दोनों लड़ाकों ने अपने साथियों और बेस की रक्षा की। इन निर्भीक लड़ाकों में से जावेद उर्फ मलंग एक ड्रोन हमले की चपेट में आने से शहीद हो गया। दलबंदिन निवासी जावेद 2025 में बीएलए में शामिल हुआ था और उसने कई मुठभेड़ों में भाग लिया था।
वहीं नरमुक निवासी कमाल खान 2022 से बीएलए से जुड़ा था और बोलन, नगाहो, सूरन, नरमुक, मंगुचर व कलात जैसे क्षेत्रों में सक्रिय था। बीएलए ने कहा कि गोला-बारूद खत्म होने पर अंतिम गोली के सिद्धांत का पालन करते हुए कमाल खान ने आत्मसमर्पण करने के बजाय गर्व से शहादत को चुना। यह घटना बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की मांग कर रहे बलूच लड़ाकों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच जारी सशस्त्र संघर्ष के बीच हुई है। अपने बयान में बीएलए ने पूर्ण स्वतंत्रता मिलने तक अपना सशस्त्र अभियान जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।