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ब्रिटिश नागरिक बनने के बाद भी ले रहा था सरकारी लाभ

मदरसा शिक्षक की सारी संपत्ति ईडी ने अटैच की

वेतन और पेंशन भी ले रहे थे मौलाना

ब्रिटिश नागरिकता की बात छिपायी थी

पचास लाख से अधिक सरकार से पायी

राष्ट्रीय खबर

लखनऊः प्रवर्तन निदेशालय के लखनऊ कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ के एक मदरसा शिक्षक शमसुद्दीन हुदा खान (शम्सुल हुदा खान) और अन्य से जुड़े मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में 53.46 लाख रुपये मूल्य की एक आवासीय भूमि को अनंतिम रूप से कुर्क कर लिया है। खान पर ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने, इसे भारतीय अधिकारियों से छिपाने, लगातार वेतन लेते रहने और राज्य में संपत्ति खरीदने का आरोप है।

कुर्क की गई संपत्ति उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के खलीबाद में खान के नाम पर पंजीकृत 189.75 वर्ग मीटर का एक भूखंड है। यह अटैचमेंट अनंतिम है और पीएमएलए के तहत निर्णायक प्राधिकारी द्वारा इसकी पुष्टि किया जाना बाकी है। यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता और भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल, आपराधिक साजिश और इससे जुड़े अन्य अपराधों से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई कई प्राथमिकियों पर आधारित है। पुलिस द्वारा ये मामले दर्ज किए जाने के बाद ईडी ने मनी-लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि खान ने 2013 में ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली थी और इस तरह उसने भारत की नागरिकता छोड़ दी थी, लेकिन उसने इस बदलाव को छिपाए रखा और खुद को भारतीय नागरिक के रूप में पेश करता रहा। उस पर संत कबीर नगर में अचल संपत्ति खरीदने के लिए अपने सरेंडर किए गए भारतीय पासपोर्ट के साथ-साथ पैन, आधार और मतदाता पहचान दस्तावेजों का उपयोग करने का आरोप है। साथ ही, वह सरकार द्वारा सहायता प्राप्त मदरसे में एक शिक्षक के रूप में सेवा में बने रहे और राज्य के खजाने से वेतन तथा बाद में सेवानिवृत्ति के लाभ लेते रहे।

एजेंसी ने पाया कि खान 19 दिसंबर 2013 को ब्रिटिश नागरिक बन गए थे। इसके बाद, उन्होंने कथित तौर पर अपनी भारतीय नागरिकता खो दी, लेकिन आज़मगढ़ के मुबारकपुर में एक सरकारी सहायता प्राप्त मदरसे में सहायक शिक्षक के रूप में काम करना जारी रखा। उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग की एक जाँच से पता चला कि 2007 से 2017 तक उनकी सेवा का कभी सत्यापन नहीं किया गया था। इसके बावजूद, उन्हें 2017 में स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति लेने की अनुमति दे दी गई और उन्हें नियमित पेंशन मिलने लगी।

ईडी ने पाया कि राज्य ने वेतन, पेंशन और जनरल प्रोविडेंट फंड भुगतान के रूप में खान के बैंक खाते में 53.46 लाख रुपये का भुगतान किया था। वे इस राशि को अपराध की कमाई मानते हैं, क्योंकि खान ने कथित तौर पर यह पैसा विदेशी नागरिक बनने और कानूनी रूप से रोजगार में न रहने के बाद प्राप्त किया था। चूंकि वह पैसा अब उपलब्ध नहीं है, इसलिए एजेंसी ने इसके बदले उसी मूल्य की संपत्ति को जब्त कर लिया है।