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डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण की पहल

डीपीडीपी एक्ट के तहत नये नियम अधिसूचित किये गये

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत सरकार ने देश के डिजिटल नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए महत्वपूर्ण कानून, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (डीपीडीपी एक्ट), 2023, के तहत विस्तृत नियमों को अधिसूचित कर दिया है।

इन नियमों का उद्देश्य अधिनियम के प्रावधानों को ज़मीनी स्तर पर लागू करना है और यह सुनिश्चित करना है कि भारत में व्यक्तिगत डेटा की प्रोसेसिंग सख्त कानूनी और नैतिक मानकों के तहत हो। इन नियमों का लागू होना भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो डेटा गोपनीयता को एक मौलिक अधिकार के रूप में स्थापित करता है।

अधिसूचित नियमों में डेटा न्यासी – यानी वे संस्थाएँ जो डेटा एकत्र और संसाधित करती हैं – और डेटा प्रिंसिपल्स – यानी वे व्यक्ति जिनका डेटा संसाधित किया जा रहा है – के अधिकारों और दायित्वों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। डेटा न्यासियों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि वे केवल वैध सहमति के आधार पर ही व्यक्तिगत डेटा एकत्र करें और उस डेटा का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए करें जिसके लिए सहमति दी गई थी। नियमों में सहमति वापसी के अधिकार और डेटा मिटाने के अधिकार जैसे डेटा प्रिंसिपल्स के अधिकारों को भी मजबूत किया गया है।

इन नियमों में डेटा उल्लंघन के मामलों से निपटने के लिए भी विस्तृत प्रक्रियाएँ शामिल हैं, जिसके तहत न्यासियों को डेटा उल्लंघनों की जानकारी जल्द से जल्द सरकार और प्रभावित व्यक्तियों को देनी होगी। अनुपालन न करने वाली संस्थाओं पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाने का प्रावधान है, जो 250 करोड़ रुपये तक हो सकता है। यह कड़ा जुर्माना कंपनियों को डेटा सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए बाध्य करेगा। इन नियमों से विदेशी कंपनियों के लिए भी भारत में संचालन करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा, जिन्हें अब भारतीय डेटा सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। यह कदम भारत को वैश्विक डेटा संरक्षण मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान दिलाएगा और नागरिकों के विश्वास को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बहाल करने में मदद करेगा।