Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
नागपंचमी पर आस्था का महासैलाब: नागलवाड़ी भिलट देव में 4 लाख भक्तों ने टेका मत्था; महाकाल पहुंचे क्रि... निकाय चुनाव के लिए कांग्रेस ने कसी कमर: भोपाल से शुरू हुआ 'बेहतर सिटी अभियान', वार्ड-वार्ड जाकर उठाए... सड़क हादसे के बाद AIIMS भोपाल में युवक हुआ ब्रेन-डेड, परिजनों ने लिया अंगदान का फैसला छिंदवाड़ा में खाद वितरण पर लगी अंतरिम रोक: धांधली के आरोपों के बीच किसानों का चक्काजाम, स्टॉक सत्याप... छिंदवाड़ा: सावन-भादों में पलाश के पत्तों से जीवंत हो रही सदियों पुरानी परंपरा, आजीविका और आस्था का अ... श्योपुर के रघुनाथपुर में स्कूल की छत भरभराकर गिरी, शाम का समय होने से टला बड़ा हादसा ग्वालियर SP ऑफिस में कांग्रेस जिला महामंत्री राजेश किरार ने खाया जहर, अस्पताल में मौत; सुसाइड नोट मे... हथियार ढूंढने गई थी पुलिस, अलमारी से निकला 3 करोड़ रुपयों का अंबार; नोट गिनने के लिए मंगवानी पड़ी मश... उज्जैन नागचंद्रेश्वर मंदिर में करंट की अफवाह से मची भगदड़: बैरिकेडिंग टूटने से कई श्रद्धालु घायल, चर... एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा केस में CBI की 636 पेज की चार्जशीट, पति समर्थ और सास पर दहेज हत्या का केस

फिर से किसान कानूनों जैसी गलती दोहरा रही मोदी सरकार

मनरेगा औऱ जी राम जी कानून पर बोले राहुल गांधी

  • इसमें अधिकार आधारित ढांचे पर संकट

  • नया कानून फिर से पूंजीपतियों के हक में

  • राष्ट्रव्यापी आंदोलन का आह्वान पर कायम

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा को खत्म कर वीबी जी राम जी अधिनियम लाकर वही गलती दोहराने जा रही है, जो उसने विवादास्पद कृषि कानूनों के समय की थी। रचनात्मक कांग्रेस द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मनरेगा श्रमिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने इस नए कानून की तुलना सीधे तौर पर उन तीन कृषि कानूनों से की, जिन्हें भारी विरोध के बाद सरकार को वापस लेना पड़ा था।

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि गरीबों को दिया गया एक काम का कानूनी अधिकार है। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान मनरेगा को पंचायती राज व्यवस्था के माध्यम से लागू करने के लिए डिजाइन किया गया था ताकि सत्ता और संसाधनों का विकेंद्रीकरण हो सके। गांधी के अनुसार, इस कानून का मुख्य उद्देश्य गरीब नागरिकों को सशक्त बनाना और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने की गारंटी देना था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी इस अधिकार-आधारित अवधारणा को ही समाप्त करना चाहती है।

कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि नए प्रस्तावित कानून यानी वीबी जी राम जी के आने से निर्णय लेने की प्रक्रिया का पूरी तरह से केंद्रीकरण हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नई व्यवस्था के तहत भाजपा शासित राज्यों को प्राथमिकता दी जाएगी और फंड आवंटन में पक्षपात होगा। उन्होंने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि जो लाभ पहले सीधे मजदूरों को मिलते थे, अब वे ठेकेदारों और बड़े नौकरशाहों की जेब में जा सकते हैं। राहुल गांधी ने कहा, भाजपा का भारत मॉडल ऐसा है जहाँ धन कुछ चुनिंदा हाथों में केंद्रित रहे और गरीब कॉर्पोरेट दिग्गजों पर निर्भर बने रहें।

किसानों के आंदोलन का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी ने मजदूरों और गरीब नागरिकों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने याद दिलाया कि जिस तरह देश की एकता ने कृषि कानूनों को रद्द करने पर मजबूर किया था, उसी तरह श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी संघर्ष की आवश्यकता है।

कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर पहले ही मोर्चा खोल दिया है। 10 जनवरी से शुरू हुआ मनरेगा बचाओ संग्राम नाम का 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान पूरे देश में चलाया जा रहा है। पार्टी की मुख्य मांगों में वीबी जी राम जी अधिनियम को तत्काल वापस लिया जाए। मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल रखा जाए।

पंचायतों की शक्तियों और उनके प्रशासनिक अधिकारों को पुनः स्थापित किया जाए। इस विरोध प्रदर्शन और वैचारिक लड़ाई के माध्यम से कांग्रेस ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मनरेगा की भूमिका और गरीबों के आर्थिक सशक्तिकरण के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े विमर्श में बदलने का प्रयास कर रही है।