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पानी ने पानी तेरा रंग कैसा .. … ….

अब पानी पर भी बवाल होने लगा है। यूं ही गली मोहल्लों में पानी को लेकर महाभारत भारत में आम बात है क्योंकि लोगों को जरूरत के मुताबिक कम पानी मिलता है तो वे पानी पी पीकर सरकार को कोसने लगते हैं। इसी में किसी ने लाइन से हटकर बाल्टी लगा दी या पानी गिरा दिया तो झगड़ा शुरू।

इसके अलावा कई बार राज्यों के बीच भी पानी को लेकर तनातनी हो जाती है। इस बार पानी का विवाद अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश हो रही है। दरअसल हुआ यह है कि भारत ने सितंबर 1960 की सिंधु जल संधि में संशोधन के लिए पाकिस्तान को नोटिस जारी किया है।

सरकारी सूत्र के मुताबिक, पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को अक्षरश: लागू करने का भारत दृढ़ समर्थक व जिम्मेदार साझेदार रहा है। पाकिस्तान की कार्रवाइयों ने सिंधु जल संधि के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला, भारत को इसमें संशोधन के लिए उचित नोटिस जारी करने के लिए मजबूर किया।

भारत ने सितंबर 1960 की सिंधु जल संधि में संशोधन के लिए पाकिस्तान को नोटिस जारी किया है। सिंधु जल के लिए संबंधित आयुक्तों के माध्यम से 25 जनवरी को नोटिस दिया गया। अब नोटिस जारी होने के बाद पाकिस्तान की सत्ता फिर से अपनी परेशानियां का ठिकरा भारत के माथे फोड़ने की पुरानी चाल चलने लगे हैं।

अब पाकिस्तान में अगर आटा महंगा है, उसकी मुद्रा का अवमूल्यन हो रहा है तो इसका पानी के साथ क्या रिश्ता है, यह तो कोई पाकिस्तानी विशेषज्ञ ही बता सकता है। वैसे मेरी समझ में पाकिस्तान की सत्ता ही दरअसल भारत विरोध पर टिकी होती है। इसलिए बिना भारत की बुराई किये वहां शायद राजनीतिक लोकप्रियता हासिल नहीं की जा सकती।

शिक्षा के अभाव में वहां की जनता भी काफी हद तक भारतीय अंधभक्तों की श्रेणी में है जो हर बुराई के लिए भारत को ही जिम्मेदार मानते हैं पर यह स्वीकार नहीं करते कि अजमल कसाव जैसे लोग तो पाकिस्तान से ही हथियार लेकर भारत आते हैं।

इसी बात पर 1972 में बनी फिल्म शोर का एक गीत याद आ रहा है। इस गीत को लिखा था इंदरजीत सिंह तुलसी ने और संगीत में ढाला था लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने। इस गीत को लता मंगेशकर और मुकेश ने अपना स्वर दिया था। इसे मनोज कुमार और जया भादुड़ी पर फिल्माया गया था। गीत के बोल इस तरह हैं।

पानी रे पानी तेरा रंग कैसा
जिसमें मिला दो लगे उस जैसा
पानी रे पानी ओ पानी पानी रे पानी..

इस दुनिया में जीने वाले
ऐसे भी हैं जीते रूखी सूखी खाते हैं
और ठंडा पानी पीते
तेरे एक ही घूँट में मिलता  जन्नत का आराम

पानी रे पानी तेरा रंग कैसा
भूखे की भूख और प्यास जैसा
पानी रे पानी ओ पानी पानी रे पानी..

गंगा से जब मिले तो बनता
गंगाजल तू पावन
बादल से तू मिले तो  रिमझिम बरसे सावन
सावन आया सावन आया  रिमझिम बरसे पानी
आग ओढ़कर आग पहनकर पिघली जाए जवानी
कहीं पे देखो छत टपकती जीना हुआ हराम

पानी रे पानी तेरा रंग कैसा
दुनिया बनाने वाले रब जैसा
पानी रे पानी ओ पानी पानी रे पानी..

वैसे तो हर रंग में तेरा
जलवा रंग जमाए
जब तू फिरे उम्मीदों पर तेरा रंग समझ ना आए
कली खिले तो झट आ जाए  पतझड़ का पैगाम
पानी रे पानी तेरा रंग कैसा
सौ साल जीने की उम्मीदों जैसा

ओ पानी.. पानी रे पानी तेरा रंग कैसा
जिसमें मिला दो लगे उस जैसा
पानी रे पानी ओ पानी पानी रे पानी..

इसलिए पानी का रंग कैसा होता है, यह तय कर पाना वाकई कठिन है। भारत में भी चुनावी मौके पर किसका पानी चढ़ता और किसका उतरता है, इससे भी पानी का रंग दिखता है। किसी का चमकीला तो किसी का मटमैला। फिर से चुनावी सुगबुगाहट के बीच ही बेचारे गौतम अडाणी लगता है कि दो पाटों के बीच पिस गये हैं।

उन्हें अमेरिका संस्थान की रिपोर्ट से पहले ही राहुल गांधी ने संदेह के घेरे में ला खड़ा कर दिया था। अब रिपोर्ट आने के बाद मजबूरी में सेबी को भी उनकी सारी कंपनियों का हिसाब किताब देखने पर मजबूर होना पड़ा है। हो सकता है कि अभी तुरंत उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो क्योंकि सत्ता उनके अनुकूल है। लेकिन हमें सहारा के इतिहास को भा याद कर लेना चाहिए। कभी प्रवल प्रतापी सुब्रत राय के दरबार में हर किस्म के नग नजर आते थे। आज बेचारे कर्ज चुकाने से ज्यादा सरकारी नोटिसों का उत्तर देते देते परेशान हैं।

पानी को रंग बदलते देखने का सबसे उत्तम समय यही चुनावी मौका होता है। किसी को वाशिंग मशीन में जाकर खुद को पाक साफ साबित करने का यह खुला ऑफर है। यह अलग बात है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की वजह से अब इस वाशिंग मशीन की गुणवत्ता शायद फेल हो रही है। वरना बेचारे अडाणी को चैनलों को इंटरब्यू देकर सफाई नहीं देना पड़ता। अब सफाई देने के बाद ही अमेरिकी फर्म की रिपोर्ट ने फिर से पानी का रंग बदल दिया है।