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कोरिया जिले में जल संरक्षण का बड़ा महाभियान, इस मानसून 47 करोड़ लीटर वर्षाजल सीधे होगा भूमिगत

कोरिया (छत्तीसगढ़): जिले में भूजल स्तर को बढ़ाने और जल संरक्षण की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय व ऐतिहासिक पहल सामने आई है।

‘मोर गांव मोर पानी’ महाभियान के तहत जिले में बनाई गई 50 हजार से भी अधिक जल संरक्षण संरचनाएं इस पूरे मानसून सत्र के दौरान 47 करोड़ लीटर से ज्यादा वर्षाजल को सीधे भूगर्भ (जमीन के भीतर) में रीचार्ज करने में मदद करेंगी। केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के अनुसार, कोरिया जिला जल संरक्षण की दृष्टि से राज्य का एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है।

⛏️ मनरेगा से बने 37 हजार से ज्यादा कंटूर ट्रेंच, बैकुंठपुर और सोनहत में युद्धस्तर पर हुआ निर्माण

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा तथा ‘विकसित भारत जीरामजी योजना’ के तहत जिले में अब तक 37 हजार से अधिक कंटूर ट्रेंच (Contour Trench) का निर्माण किया जा चुका है।

इसमें अकेले बैकुंठपुर जनपद क्षेत्र में 34,944 और सोनहत जनपद क्षेत्र में 2,440 कंटूर ट्रेंच शामिल हैं। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, प्रत्येक कंटूर ट्रेंच एक बार में लगभग 1,080 लीटर वर्षाजल को रोककर 24 घंटे के भीतर जमीन के अंदर समाहित करने की क्षमता रखता है।

🕳️ 10 हजार सोख्ता गड्ढों से भी रीचार्ज होगा भूजल, जनभागीदारी से बदला गांव-गांव का परिदृश्य

वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल ‘मोर गांव मोर पानी महाभियान’ के तहत जनभागीदारी के माध्यम से जिले भर में 10 हजार से अधिक सोख्ता गड्ढों का निर्माण कराया गया है।

निर्माण मानकों के मुताबिक, प्रत्येक सोख्ता गड्ढा एक बार में कम से कम 1,000 लीटर वर्षाजल को सीधे जमीन के अंदर गहराई तक पहुंचाने की क्षमता रखता है। इससे ग्रामीण इलाकों में जलभराव की समस्या से भी निजात मिल रही है।

📊 आंकड़ों के गणित से समझिए: कैसे 47 करोड़ लीटर पानी होगा रीचार्ज?

तकनीकी आकलन और जल वैज्ञानिक गणना के अनुसार, यदि प्रत्येक कंटूर ट्रेंच मानसून के दौरान कम से कम 10 बार भी भरता है, तो 37 हजार से अधिक कंटूर ट्रेंचों के माध्यम से लगभग 40 करोड़ लीटर वर्षाजल सीधे भूमिगत होगा।

इसी प्रकार, 10 हजार से अधिक सोख्ता गड्ढों के जरिए पूरे मानसून काल में 7 करोड़ लीटर से अधिक वर्षाजल का भूजल पुनर्भरण (Recharge) संभव हो सकेगा। इस तरह कुल मिलाकर 47 करोड़ लीटर से ज्यादा वर्षाजल सीधे धरती की कोख में समाएगा।

🗣️ “आज का जल संरक्षण आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करेगा”: कलेक्टर रोक्तिमा यादव की अपील

कोरिया की कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “आज जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे हमारे प्रयास ही हमारी आने वाली पीढ़ियों का सुरक्षित भविष्य तय करेंगे। आम नागरिकों से भी अपील है कि वे अपने घरों की छतों पर गिरने वाले वर्षाजल को वॉटर हार्वेस्टिंग के जरिए सहेजने का प्रयास करें।”

वहीं मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) योगेन्द्र श्रीवास ने बताया कि कंटूर ट्रेंच और सोख्ता गड्ढों के माध्यम से करोड़ों लीटर बारिश के पानी को भूमिगत करने का व्यापक रोडमैप तैयार कर उस पर अमल किया गया है।

💡 जानिए क्या होता है कंटूर ट्रेंच और कैसे रोकता है मिट्टी का कटाव?

कंटूर ट्रेंच (Contour Trench) जिसे हिंदी में ‘समोच्च खाई’ कहा जाता है, पहाड़ी या ढलान वाली भूमि पर पानी की गति को धीमा करने और मिट्टी के कटाव को रोकने की एक वैज्ञानिक तकनीक है।

इसे ढलान के विपरीत आड़ी रेखाओं में खोदा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर बेकार जाने से रोकना, मिट्टी की नमी बनाए रखना और भू-जल स्तर (Ground Water Level) में सुधार करना होता है।