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महिला कोटा ठीक पर परिसीमन असली मुद्दाः सोनिया गांधी

संसद सत्र प्रारंभ होने के पहले ही वैचारिक युद्ध की झलक

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने 16-18 अप्रैल तक संसद का एक विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें संविधान संशोधन के दो महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश किया जाएगा। इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करना और उनमें से एक-तिहाई—सटीक रूप से 273 सीटें—महिलाओं के लिए आरक्षित करना है। हालांकि, इस योजना के साथ जुड़ी कुछ शर्तें, विशेषकर चुनावी मानचित्र के परिसीमन के मुद्दे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है।

संविधान संशोधन के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो फिलहाल भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास नहीं है, इसलिए सरकार को विपक्षी दलों के समर्थन की जरूरत होगी। प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि ये बदलाव उस वादे को पूरा करते हैं जो सभी दलों ने मिलकर किया था। दूसरी ओर, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक लेख के माध्यम से स्पष्ट किया है कि असली विवाद महिला आरक्षण को लेकर नहीं है—जिस पर सभी सहमत हैं—बल्कि इसके साथ जोड़े गए परिसीमन अभ्यास को लेकर है।

केंद्रीय कैबिनेट ने विशेष सत्र के लिए दो विधेयकों को मंजूरी दी है। पहला विधेयक लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि (543 से 816) का प्रस्ताव रखता है, जिसमें अतिरिक्त 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। दूसरा विधेयक सीटों के नए सिरे से निर्धारण यानी परिसीमन से संबंधित है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पूरी कवायद 2011 की जनगणना के आधार पर की जाएगी, न कि वर्तमान में चल रही नई जनगणना के आधार पर, जिसके आंकड़े उपलब्ध होने में अभी समय लगेगा।

सोनिया गांधी ने महिला कोटा और परिसीमन के बीच एक स्पष्ट रेखा खींचते हुए इसे संविधान पर हमला करार दिया है। उन्होंने लिखा, महिलाओं के लिए आरक्षण यहां मुद्दा नहीं है, वह पहले ही तय हो चुका है। असली मुद्दा परिसीमन है, जो अनौपचारिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर अत्यंत खतरनाक और स्वयं संविधान पर प्रहार है। विपक्ष को डर है कि जनगणना के पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करने से चुनावी प्रतिनिधित्व और राज्यों के बीच शक्ति का संतुलन प्रभावित हो सकता है।