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कांग्रेस की अगुवाई वाले यूडीएफ को केरल में सत्ता का भरोसा

राज्य में अस्सी सीट जीतने का दावा किया

राष्ट्रीय खबर

तिरुवनंतपुरमः केरल में 9 अप्रैल को संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के बाद कयासों का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) ने अपनी आंतरिक समीक्षा के बाद एक बड़ा दावा पेश किया है। यूडीएफ के रणनीतिकारों का मानना है कि इस बार सत्ता विरोधी लहर के चलते वे 80 सीटों का जादुई आंकड़ा आसानी से पार कर लेंगे। यह आकलन सत्तारूढ़ माकपा के उन दावों के विपरीत है, जिसमें वे अपने प्रमुख मंत्रियों की जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं।

यूडीएफ के जिला स्तरीय फीडबैक के अनुसार, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के मंत्रिमंडल के तीन कद्दावर चेहरे—स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज, जल संसाधन मंत्री रोशी ऑगस्टीन और स्थानीय स्वशासन मंत्री एम.बी. राजेश—अपनी सीटें गंवा सकते हैं। जहां माकपा इन मंत्रियों की प्रशासनिक उपलब्धियों के दम पर जीत का भरोसा जता रही है, वहीं यूडीएफ इसे जमीनी हकीकत से दूर बता रहा है।

राजधानी में यूडीएफ को कोवलम, वट्टीयूरकावु और अरुविक्कारा जैसी पारंपरिक सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत दिखने की उम्मीद है। कोल्लम जिले में पार्टी न केवल कुंदरा और करुणागपल्ली को बचाने का दावा कर रही है, बल्कि कोल्लम शहर की सीट पर भी कब्जा करने की तैयारी में है।

कोट्टायम में पुथुपल्ली और चंगनासेरी जैसी सीटों पर यूडीएफ भारी अंतर से जीत की उम्मीद कर रहा है। इदुक्की में पार्टी का मानना है कि पिछले स्थानीय निकाय चुनावों की लहर अभी भी कायम है, जो मंत्री रोशी ऑगस्टीन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

पथनमथिट्टा की अरनमुला सीट पर स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज के खिलाफ यूडीएफ ने कड़ी घेराबंदी का दावा किया है। वहीं, एर्नाकुलम जिला यूडीएफ का सबसे बड़ा किला बनकर उभर सकता है, जहां पार्टी 14 में से 13 सीटों पर अपनी जीत तय मान रही है।

पार्टी का मानना है कि यदि अलाप्पुझा, त्रिशूर और पलक्कड़ जैसे जिलों में प्रो-यूडीएफ लहर अपने चरम पर रहती है, तो सीटों की कुल संख्या 80 से भी ऊपर जा सकती है। त्रिशूर में कड़े त्रिकोणीय मुकाबलों के बावजूद कांग्रेस को उम्मीद है कि मतदाता अंततः उनके पक्ष में झुकेंगे। पलक्कड़ में एम.बी. राजेश के खिलाफ बनाई गई रणनीति को यूडीएफ अपनी सबसे बड़ी सफलता मान रहा है। अब सबकी निगाहें चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगी कि यूडीएफ का यह 80 पार का दावा हकीकत बनता है या माकपा की एलडीएफ रिटर्न्स की उम्मीदें।