भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के जारी की चेतावनी
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्लीः भारत में वर्ष 2026 के दौरान तीन वर्षों में पहली बार सामान्य से कम मानसून रहने की संभावना है। सरकार द्वारा सोमवार को जारी इस पूर्वानुमान ने एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में कृषि उत्पादन और आर्थिक विकास को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जो पहले से ही ईरान युद्ध के कारण उपजी मुद्रास्फीति से जूझ रही है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस वर्ष मानसून के दीर्घकालिक औसत का 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है। आमतौर पर मानसून 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है और मध्य सितंबर तक वापस लौटता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 87 सेमी की 50 वर्षीय औसत वर्षा का 96 से 104 प्रतिशत हिस्सा सामान्य माना जाता है, जबकि 92 प्रतिशत का स्तर सामान्य से कम की श्रेणी में आता है।
आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा, वर्तमान में कमजोर ला नीना जैसी स्थितियां तटस्थ स्थितियों में बदल रही हैं। हालांकि, जून के बाद अल नीनो के विकसित होने की प्रबल संभावना है। अल नीनो एक ऐसी मौसमी घटना है जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप अक्सर दक्षिण पूर्व एशिया और दुनिया के अन्य हिस्सों में गर्म और शुष्क मौसम रहता है।
इतिहास गवाह है कि भारत ने अधिकांश अल नीनो वर्षों के दौरान कम वर्षा का सामना किया है, जिससे कभी-कभी गंभीर सूखे की स्थिति पैदा हुई है और फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है। ऐसी स्थितियों में अधिकारियों को अनाज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने जैसे कड़े कदम उठाने पड़ते हैं। हालांकि, महापात्र ने एक सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि मानसून के उत्तरार्ध में पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोल की स्थिति विकसित होने की संभावना है, जो मानसून को सहारा दे सकती है। आईओडी पश्चिमी और पूर्वी हिंद महासागर के सतही तापमान के अंतर को दर्शाता है, जहां पश्चिमी हिस्से का गर्म होना भारत में बेहतर बारिश में सहायक होता है।