इस बार खुली अदालत में मामले की सुनवाई की मांग
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्लीः छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद ने 2020 के दिल्ली दंगा साजिश मामले में अपनी जमानत याचिका खारिज करने के सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की है। खालिद ने अदालत से अनुरोध किया है कि इस मामले की सुनवाई बंद कमरे (चेंबर) के बजाय खुली अदालत (ओपन कोर्ट) में की जाए।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के माध्यम से खालिद ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ से यह आग्रह किया। वर्तमान में, इस पुनर्विचार याचिका पर 16 अप्रैल को चेंबर में विचार किया जाना निर्धारित है। सिब्बल ने अदालत को सूचित किया कि खुली अदालत में सुनवाई के लिए आवेदन पहले ही दिया जा चुका है, जिस पर न्यायमूर्ति कुमार ने कहा कि वे दस्तावेजों को देखेंगे और आवश्यकता पड़ने पर सुनवाई बुलाएंगे।
नियमों के अनुसार, पुनर्विचार याचिकाओं की जांच आमतौर पर न्यायाधीशों द्वारा चेंबर में ही की जाती है, लेकिन यदि पक्षकारों को लगता है कि कोई गंभीर अन्याय हुआ है, तो वे खुली अदालत में सुनवाई की मांग कर सकते हैं। इससे पहले, 5 जनवरी को शीर्ष अदालत ने खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जबकि पांच अन्य आरोपियों को राहत दी थी। अदालत ने टिप्पणी की थी कि खालिद और इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है और उनकी भूमिका दंगों की योजना, लामबंदी और रणनीतिक दिशा तय करने में केंद्रीय थी।
अदालत ने स्पष्ट किया था कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) मौलिक है, लेकिन इसे सार्वजनिक व्यवस्था और सामुदायिक सुरक्षा के साथ संतुलित करना आवश्यक है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा, जो सीएए और एनआरसी विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी, एक पूर्व-नियोजित साजिश थी। इस हिंसा में 53 लोगों की जान गई थी और 700 से अधिक घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस का तर्क है कि ये दंगे सहज नहीं थे, बल्कि भारत की संप्रभुता पर एक सुनियोजित हमला थे। उमर खालिद सितंबर 2020 से हिरासत में हैं।