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अमेरिकी विशेष बलों का ईरान में साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन

दुर्घटनाग्रस्त फाइटर जेट के पायलट को बचाने की कोशिश

वाशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच शुक्रवार की रात एक अत्यंत जोखिम भरा घटनाक्रम सामने आया। अमेरिकी विशेष बलों ने ईरानी सीमा के भीतर घुसकर अपने एक लापता विमान चालक को सुरक्षित बाहर निकाल लेने के लिए एक अभियान प्रारंभ किया है।

दूसरी तरफ यह भी जानकारी मिली है कि ईरान की सेना भी इस विमान पर सवार लोगों को पकड़ने के लिए प्रयासरत हैं। यह रेस्क्यू ऑपरेशन उस समय शुरू किया गया जब ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र में अमेरिका के एक एफ-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया। प्रारंभिक इंकार के बाद अमेरिका ने यह स्वीकार किया है कि उसका यह अत्यधिक आधुनिक और गुप्त रहने वाला विमान दूसरी बार ईरानी हमले को नहीं झेल पाया है। इससे अमेरिकी स्टिल्थ विमान का दावा भी गलत प्रमाणित हो रहा है।

विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उसमें सवार दो चालक दल के सदस्य पैराशूट के जरिए नीचे कूद गए थे। इसके तुरंत बाद, फंसे हुए अमेरिकी सैनिकों को खोजने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच एक होड़ मच गई। इस जटिल ऑपरेशन में दो अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टरों और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले रिफ्यूलिंग विमानों का उपयोग किया गया।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, रेस्क्यू मिशन के दौरान ईरानी सेना ने हल्के हथियारों से भारी गोलाबारी की। गोलाबारी में दोनों अमेरिकी हेलीकॉप्टर निशाने पर आए, जिनमें से एक से इराक की सीमा में लौटते समय धुआं निकलते देखा गया। हालांकि, भारी बाधाओं के बावजूद हेलीकॉप्टरों की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई।

बचाव अभियान के बावजूद, दूसरे अमेरिकी एयरमैन का ठिकाना अभी भी अज्ञात बना हुआ है। ईरानी सरकारी मीडिया ने स्थानीय मिलिशिया (सशस्त्र समूहों) के फुटेज प्रसारित किए हैं, जो उसकी तलाश में तलाशी अभियान चला रहे हैं। ईरान ने इसे एक बड़ी प्रोपोगैंडा जीत बताते हुए लापता अमेरिकी सैनिक को पकड़ने के लिए 60,000 डॉलर के इनाम की घोषणा की है। इसी बीच, हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक अमेरिकी ए-10 वारथोग विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की भी खबर है, हालांकि इसके पायलट को सुरक्षित बचा लिया गया है।

यह घटनाक्रम तब हुआ है जब डोनाल्ड ट्रम्प के उस बयान के बाद, जिसमें उन्होंने ईरान को पत्थर युग में भेजने की कसम खाई थी, अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले तेज कर दिए हैं। हालिया हवाई हमलों में तेहरान के प्रतिष्ठित शाहिद बेहेश्टी विश्वविद्यालय को भी निशाना बनाया गया है। नागरिक बुनियादी ढांचों जैसे पुलों और चिकित्सा संस्थानों पर बढ़ते हमलों के बीच शांति वार्ताओं के प्रयास पूरी तरह विफल हो गए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुँच गया है।