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अस्पताल पर ड्रोन हमला में 10 लोगों की मौत

देश के आरएसएफ की ओर से फिर हुआ गलत हमला

खार्तूम: सूडान में पिछले एक साल से जारी गृहयुद्ध ने अब मानवीय संवेदनाओं की सभी सीमाएं लांघ दी हैं। अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा सहायता संगठन डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने दक्षिण-मध्य सूडान के एक अस्पताल पर हुए भीषण ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की है। गुरुवार को व्हाइट नाइल राज्य के अल जबलैन अस्पताल को निशाना बनाकर किए गए इस हमले में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई है। एमएसएफ के अनुसार, यह हमला कथित तौर पर अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज द्वारा अंजाम दिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ड्रोन से दो सटीक हमले किए गए, जिनमें अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर और प्रसूति वार्ड (मैटरनिटी वार्ड) को निशाना बनाया गया। सूडान आपातकालीन प्रमुख एस्पेरांज़ा सैंटोस ने बताया कि मृतकों में सात चिकित्सा कर्मी शामिल हैं, जिनमें से कुछ पूर्व में संगठन के साथ काम कर चुके थे। यह हमला और भी भयावह इसलिए था क्योंकि उस समय अस्पताल में बच्चों के लिए टीकाकरण अभियान चल रहा था। निर्दोष बच्चों और स्वास्थ्य कर्मियों को निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।

सूडान में अप्रैल 2023 में सेना और आरएसएफ के बीच शुरू हुए संघर्ष के बाद से स्वास्थ्य सुविधाएं लगातार निशाने पर हैं। अल जबलैन अस्पताल के अलावा, गुरुवार को ही व्हाइट नाइल प्रांत की राजधानी रबक में एक मेडिकल सप्लाई डिपो पर भी हमला किया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, युद्ध शुरू होने से अब तक स्वास्थ्य सुविधाओं पर 200 से अधिक हमले हो चुके हैं। पिछले महीने ही दारफुर क्षेत्र के एक अस्पताल पर हुए हमले में 13 बच्चों सहित 70 लोगों की जान चली गई थी।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय चिंता सूडान के संस्कृति और सूचना मंत्री खालिद एलीसिर ने इस हमले की तीव्र भर्त्सना की है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए आरएसएफ को एक आतंकवादी संगठन घोषित करने और उसके सदस्यों पर मुकदमा चलाने की मांग की। उन्होंने उन क्षेत्रीय देशों को भी जिम्मेदार ठहराया जो इन समूहों को उन्नत हथियार और ड्रोन प्रणाली उपलब्ध करा रहे हैं। स्थानीय मानवाधिकार समूहों और सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क ने इसे निहत्थे नागरिकों पर जानबूझकर किया गया हमला करार दिया है, जिससे देश का पहले से ही चरमराया हुआ स्वास्थ्य क्षेत्र पूरी तरह ध्वस्त होने की कगार पर है।