ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी पर राहुल का तंज
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ईरान युद्ध पर पहले चेतावनी दी थी
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व्यापार डील पर भी अपनी बात रखी
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अडानी की रिहाई का समझौता किया है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को ईंधन की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी और हालिया भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर चौतरफा हमला बोला है। राहुल गांधी ने देश में बढ़ते आर्थिक बोझ और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों और गलतियों का खामियाजा देश की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
यह विवाद तब गहराया जब सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 3 रुपये की बढ़ोतरी का फैसला किया। गौरतलब है कि पिछले चार से अधिक वर्षों के लंबे अंतराल के बाद देश में ईंधन की कीमतों में यह पहली वृद्धि दर्ज की गई है। इस मूल्य वृद्धि के पीछे वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। दरअसल, पश्चिम एशिया में भड़के ईरान युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़े इस आर्थिक दबाव का एक बड़ा हिस्सा सरकारी तेल कंपनियों ने सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं की जेब पर डाल दिया है, जिससे देश में महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईंधन के दामों के अलावा, राहुल गांधी ने भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया व्यापार समझौते को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर अपना हमला तेज करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की। राहुल गांधी ने लिखा, दबाव में आए प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ कोई व्यापार समझौता नहीं किया है, बल्कि यह सिर्फ अडानी की रिहाई के लिए किया गया एक राजनीतिक और व्यापारिक सौदा है।
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी इस पूरे घटनाक्रम और ट्रेड डील की कड़ी आलोचना करते हुए इसे पूरी तरह से एकतरफा करार दिया है। कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि इस समझौते के बाद अब अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ चल रहा धोखाधड़ी का मामला बंद कर दिया जाएगा। कांग्रेस का दावा है कि यह बात अब पूरी तरह साफ हो चुकी है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के सामने घुटने टेकते हुए यह एकतरफा समझौता सिर्फ और सिर्फ अडानी को कानूनी राहत और सहूलियत देने के उद्देश्य से किया है। पार्टी ने अंत में तंज कसते हुए कहा कि यही मुख्य वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका के सामने भारत के हितों को लेकर खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते हैं।