केंद्र सरकार की चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल
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सीबीआई निदेशक के चयन पर असहमति
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संस्थागत कब्जे का विरोध करते रहेंगे
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इसे विपक्ष के खिलाफ हथियार बनाया है
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: देश की सबसे प्रतिष्ठित जांच एजेंसी, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के अगले मुखिया की तलाश के बीच एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मंगलवार, 12 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित आधिकारिक आवास पर एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य वर्तमान निदेशक प्रवीण सूद के उत्तराधिकारी का चयन करना था, जिनका कार्यकाल आगामी 24 मई को समाप्त हो रहा है। हालांकि, बैठक का परिणाम सहमति के बजाय तीखे मतभेदों के साथ सामने आया।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस चयन प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण करार देते हुए इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया और प्रधानमंत्री को दो पन्नों का एक विस्तृत असहमति नोट सौंपा। बाद में उन्होंने इसे सार्वजनिक भी कर दिया। गांधी का मुख्य आरोप यह है कि केंद्र सरकार ने सीबीआई को एक स्वतंत्र संस्था के बजाय राजनीतिक औजार में तब्दील कर दिया है। उन्होंने अपने नोट में संस्थानिक कब्जे शब्द का प्रयोग करते हुए कहा कि एजेंसी का इस्तेमाल चुन-चुनकर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों, स्वतंत्र पत्रकारों और सरकार के आलोचकों को डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है।
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी के अलावा भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत भी शामिल थे। राहुल गांधी ने प्रक्रियात्मक खामियों पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के नेता की भूमिका केवल औपचारिक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उन्हें एक रबर स्टैंप की तरह इस्तेमाल करना चाहती है। उनके अनुसार, चयन के लिए विचार किए जा रहे 69 उम्मीदवारों के संबंध में महत्वपूर्ण स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट और 360-डिग्री रिपोर्ट उन्हें पहले उपलब्ध नहीं कराई गई।
गांधी ने सवाल उठाया कि बिना उम्मीदवारों के पिछले प्रदर्शन और निष्ठा की विस्तृत जांच किए, महज़ एक घंटे की बैठक में इतने महत्वपूर्ण पद का फैसला कैसे किया जा सकता है? उन्होंने कहा, मुझसे यह उम्मीद की गई कि मैं बैठक की मेज पर बैठकर पहली बार इन दर्जनों फाइलों को देखूं, जबकि गहराई से जांच के लिए अनिवार्य 360-डिग्री रिपोर्ट देने से साफ इनकार कर दिया गया।
इस बीच, सूत्रों का कहना है कि सरकार ने पराग जैन, शत्रुजीत कपूर, योगेश गुप्ता, जीपी सिंह और प्रवीर रंजन जैसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का एक पैनल तैयार किया है। हालांकि राहुल गांधी की कड़ी असहमति के बाद अब सरकार के अगले कदम और नए निदेशक की नियुक्ति की पारदर्शिता पर देशभर की निगाहें टिकी हैं। विपक्ष का मानना है कि यदि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होगी, तो सीबीआई की साख और भी धूमिल होगी।