अपने पुराने तेवर से सड़क के संघर्ष पर उतर आयी टीएमसी
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हमारे नेताओं पर हमले हो रहे हैं
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विधायकों को डराया जा रहा है
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हम संविधान के साथ खड़े हैं
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः पश्चिम बंगाल में चुनावों के बाद उपजी राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। हाल ही में राज्य में तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाए जाने के बाद, पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कोलकाता की सड़कों पर मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को रानी रासमणि एवेन्यू में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन ने न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच की तनातनी को भी सार्वजनिक कर दिया है।
प्रदर्शन का आगाज प्रतीकात्मक और संदेशपूर्ण रहा। ममता बनर्जी ने वरिष्ठ नेता डोला सेन और सांसद कल्याण बनर्जी के साथ बाबा साहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर विरोध शुरू किया। इस दौरान उन्होंने संविधान की प्रति को अपने हाथों में ऊंचा उठाकर यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी यह लड़ाई लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और संवैधानिक अधिकारों के हनन के खिलाफ है।
यह उग्र विरोध मुख्य रूप से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी पर हुए जानलेवा हमलों के जवाब में है। अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया है कि दक्षिण 24 परगना जिले में जब वे अपने राजनीतिक कार्यक्रमों के सिलसिले में दौरे पर थे, तब उन पर ईंटों, पत्थरों और अंडों से सुनियोजित हमला किया गया, जिसमें उनकी आंख में गंभीर चोट आई है। वहीं, कल्याण बनर्जी ने चंडीतला पुलिस थाना क्षेत्र में हुई घटना को सीधे तौर पर हत्या का प्रयास करार दिया है।
ममता बनर्जी ने इन घटनाओं को तर्कहीन, असहिष्णु और निरंकुश आचरण की पराकाष्ठा बताया। उन्होंने सार्वजनिक मंच से सवाल किया कि आखिर किस लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक विपक्षी दल के वरिष्ठ नेताओं को इस तरह हिंसा का निशाना बनाया जा सकता है? उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि हिंसा की ऐसी कायरतापूर्ण घटनाएं टीएमसी को कमजोर करने के बजाय पार्टी संगठन को पहले से अधिक एकजुट और जुझारू बनाएंगी।
प्रदर्शन के दौरान ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें कोलकाता में लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने से रोकने का कोई भी प्रयास किया गया, तो वे इस आंदोलन को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर तक ले जाने में संकोच नहीं करेंगी। फिलहाल, पुलिस ने अभिषेक बनर्जी पर हमले के मामले में पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल के अशांत राजनीतिक माहौल की एक भयावह तस्वीर पेश करता है। आने वाले दिनों में यह टकराव राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा, इसे लेकर पूरे देश में चिंता और उत्सुकता बनी हुई है।