तसलीमा नसरीन की टिप्पणी पर सीजेपी संस्थापक का बयान
बांग्लादेश या नेपाल जैसा नहीं होगा
हम लगातार संविधान के दायरे में हैं
पुलिस की बर्बरता की वजह से ऐसी चर्चा
छत्रपति संभाजीनगरः सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोमवार को कहा कि भारत के छात्र प्रदर्शनकारियों को बांग्लादेश या नेपाल की घटनाओं की ओर देखने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हमारे पास महात्मा गांधी की विरासत है, जो पूरी दुनिया को शांतिपूर्ण विरोध के लिए प्रेरित करती है। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित अपने आवास पर दिए एक साक्षात्कार में दिपके ने सीजेपी के विस्तार, नीट के उन उम्मीदवारों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग पर जोर दिया, जिन्होंने आत्महत्या कर ली थी, और भारत में शिक्षा की स्थिति पर सरकार की आलोचना की।
दिपके ने निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन की उस टिप्पणी को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दिल्ली में परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ सीजेपी के विरोध प्रदर्शन की तुलना बांग्लादेश के उस 2024 के आंदोलन से की थी, जिसने शेख हसीना की अवामी लीग सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था। उन्होंने जोर देकर कहा, बांग्लादेश और नेपाल के विरोध प्रदर्शनों का उपयोग हमें बदनाम करने के लिए किया जा रहा है, हम उनसे बिल्कुल अलग हैं। हमने हाल ही में दिल्ली के प्रदर्शन में दिखाया कि हम संविधान का पालन कर रहे हैं और शांतिपूर्वक अपना प्रदर्शन कर रहे हैं।
दिपके ने कहा कि लोग बांग्लादेश और नेपाल का उल्लेख इसलिए कर रहे हैं क्योंकि पुलिस की कथित बर्बरता ने उन्हें वहां की घटनाओं की याद दिला दी होगी। उन्होंने कहा, भारत के छात्र न तो हिंसक थे और न ही आक्रामक। उनके सिर, हाथ और पैर तोड़े गए, लेकिन उन्होंने संयम बनाए रखा और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक बैठे रहे।
शिक्षा को हर चुनाव का मुख्य एजेंडा बनाने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा, यदि आप शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि आप देश के भविष्य के बारे में नहीं सोच रहे हैं। दिपके ने नीट पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने में देरी के लिए सरकार की तीखी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया, सरकार के पास रातों-रात सरकारें गिराने के लिए पैसा है। आप करोड़ों रुपये खर्च करके सांसद और विधायक खरीद सकते हैं, लेकिन जब नीट पीड़ितों की बात आती है, तो आप नियमों का बहाना बनाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ही उनकी मांगें नहीं मानती है, तो वे एक और आंदोलन शुरू करेंगे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने झारखंड में सार्वजनिक सेवा परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों का भी समर्थन किया।