जयदेव विहार भुवनेश्वर में दिल को छू लेने वाला दृश्य
मौजूद लोगों की आंखों में आये आंसू
पूरा परिवार मध्यप्रदेश में मारा गया
सत्ताइस को उसकी शादी तय थी
राष्ट्रीय खबर
भुवनेश्वरः भुवनेश्वर: राजधानी भुवनेश्वर के जयदेव विहार इलाके में रविवार को एक ऐसा हृदय विदारक और झकझोर देने वाला दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर ठीक उसी तरह पत्थर कर दीं, जैसे कोई बहुत बड़ा वज्रपात हुआ हो। घर के आंगन में एक साथ सात अर्थियां रखी हुई थीं। मध्यप्रदेश में हुए एक भीषण सड़क हादसे में अपने पूरे परिवार को हमेशा के लिए खो चुके बनमाली बेहरा का घर इस समय चीख-पुकार और कोहराम से गूंज रहा था। पूरा इलाका इस मातम में डूबा हुआ था कि आखिर एक ही झटके में हंसता-खेलता परिवार कैसे उजड़ गया।
इसी मातम और भीड़ को चीरता हुआ एक युवक धीरे-धीरे आगे बढ़ा। उसके हाथ में सिंदूर की एक डिब्बी थी और आंसुओं से उसकी आंखें पूरी तरह लाल हो चुकी थीं। उसके सामने अर्थी पर उसकी मंगेतर, 29 वर्षीय राधारानी का पार्थिव शरीर लेटा हुआ था। महज़ छह दिन बाद यानी 27 सितंबर को जिस लड़की को उसने अपने घर की दुल्हन बनाकर लाने के सपने संजोए थे, आज वह उसकी अर्थी के सामने खड़ा था।
युवक धीमे कदमों से अर्थी के पास बैठा, अपने कांपते हाथों से सिंदूर की डिब्बी खोली और सबके सामने अपनी सुन्न पड़ी राधारानी की मांग में सिंदूर भर दिया। उसके माथे पर बिंदी लगाई और खुद को रोक न पाने के कारण फफकते हुए बस इतना कहा, तू आज से मेरी पत्नी है। हमारा सात जन्मों का वादा था, चलो एक जन्म में ही सही, यह रिश्ता पूरा हुआ। इस दर्दनाक पल को देखकर वहां मौजूद हर एक व्यक्ति का कलेजा चीर गया।
यह बेहद मार्मिक रस्म पुरी के प्रसिद्ध स्वर्गद्वार में नहीं, बल्कि दुखी पिता बनमाली बेहरा के जयदेव विहार स्थित आवास के आंगन में ही पूरी की गई। परिवार वालों ने बताया कि राधारानी की शादी की सभी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। वह महाकाल के दरबार में जाकर अपनी शादी की मन्नत मांगने के लिए ही मध्य प्रदेश गई थी, जहां यह अनहोनी घट गई। घर में उसकी लाल बनारसी साड़ी, विवाह के जोड़े और सुहाग की निशानियां—शंखा-पोला—सब कुछ पहले से रखे हुए थे।
बेटी की इस हालत को देखकर बेसुध पिता ने भारी मन से कहा, मेरी बेटी कुंवारी नहीं जाएगी। मैं उसे सुहागन बनाकर ही विदा करूंगा। इसके बाद राधारानी को उसी लाल जोड़े में सजाया गया, हाथों में शंखा पहनाया गया और उसके मंगेतर ने उसकी मांग भरकर उसे हमेशा के लिए अपना बना लिया। जिस आंगन में कुछ दिनों बाद शहनाइयों की गूंज और शादी के मंगल गीत गूंजने थे, वहां रविवार को सिर्फ सिसकियां और एक अधूरे प्यार की सबसे दर्दनाक दास्तां गूंज रही थी।