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सीबीआई की याचिका पर अगली सुनवाई चार मई को

दिल्ली आबकारी मामले की हाईकोर्ट में सुनवाई

  • कोर्ट की कार्यवाही और रिकॉर्ड की मांग

  • अब जाकर ट्रायल कोर्ट के दस्तावेज मांगे

  • क्या है सीबीआई की मुख्य आपत्ति?

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में कानूनी खींचतान एक बार फिर तेज हो गई है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई टाल दी है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य वरिष्ठ नेताओं को दोषमुक्त (डिस्चार्ज) करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए सोमवार, 4 मई 2026 की तारीख तय की है।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता और कानूनी बारीकियों को देखते हुए ट्रायल कोर्ट के संपूर्ण रिकॉर्ड का अवलोकन करना आवश्यक है। अदालत ने संबंधित निचली अदालत से इस केस से जुड़े सभी दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और सबूतों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन रिकॉर्ड्स के आधार पर ही उच्च न्यायालय यह तय करेगा कि क्या निचली अदालत का उन्हें आरोपमुक्त करने का निर्णय कानून सम्मत था या नहीं।

सीबीआई ने फरवरी 2026 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जांच एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और कुछ अन्य आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने की बात कहकर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था। सीबीआई की दलील है कि उनके पास नीति निर्माण में गड़बड़ी और आर्थिक लाभ पहुंचाने के ठोस साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें ट्रायल के दौरान पेश किया जाना चाहिए। एजेंसी का तर्क है कि आरोपियों को इस चरण में दोषमुक्त करना न्यायोचित नहीं है।

यह मामला साल 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का आरोप है कि नीति को इस तरह से तैयार किया गया था जिससे कुछ चुनिंदा शराब व्यापारियों को अनुचित लाभ मिले और उसके बदले में प्राप्त राशि का उपयोग राजनीतिक गतिविधियों में किया गया।

4 मई को होने वाली सुनवाई काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यदि हाईकोर्ट सीबीआई की दलीलें स्वीकार कर लेता है, तो इन नेताओं के खिलाफ फिर से मुकदमा (ट्रायल) शुरू हो सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें हाईकोर्ट द्वारा मांगे गए ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड्स और आगामी सोमवार की बहस पर टिकी हैं।