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यूक्रेन के ए आई संचालित ड्रोनों को धोखा देने का तरीका

रूसी ट्रकों पर डैज़ल पेंट का उपयोग हो रहा

एजेंसियां

मॉस्कोः यूक्रेन-रूस युद्ध के बदलते स्वरूप ने सैन्य रणनीति में नवाचार को अनिवार्य बना दिया है। युद्ध के शुरुआती दौर से ही रूसी सेना अपने बख्तरबंद वाहनों और रसद ट्रकों को दुश्मन की नजरों से बचाने के लिए कई अपरंपरागत तरीके अपनाती रही है। इसी कड़ी में, अब रूसी ट्रकों पर डैज़ल पेंट  का प्रयोग चर्चा का विषय बना हुआ है। यह तकनीक वास्तव में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जहाजों को छलावरण  देने के लिए उपयोग की जाती थी, जिसे अब रूस ने आधुनिक एआई-आधारित युद्धक्षेत्र के अनुरूप ढाल लिया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई यूराल और कामज़ ट्रकों की तस्वीरों से यह स्पष्ट होता है कि रूस ने दो प्रकार के जटिल डिजाइनों का उपयोग किया है: एक ज़ेबरा-शैली जिसमें सीधी और चौड़ी रेखाएं हैं, और दूसरा अधिक जैविक व पत्तों जैसा घुमावदार डिजाइन। इन डिजाइनों की विशेषता यह है कि इन्हें वाहन के मुख्य ढांचे से लेकर उसके पहियों और टायरों तक पर पूरी तरह फैलाया गया है। पेंटिंग की यह तकनीक गहरे हरे आधार पर सफेद और काले रंगों का इस्तेमाल कर वाहन की स्पष्ट रूपरेखा को तोड़ने का काम करती है।

इस डैज़ल पेंट के उपयोग का मूल उद्देश्य केवल मानव नेत्र को धोखा देना नहीं है, बल्कि यह मशीनी आंखों—मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस कैमरों—को भ्रमित करने का एक प्रयास है। वर्तमान में, यूक्रेनी सेना इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड सेंसर वाले ऐसे ड्रोनों का उपयोग कर रही है, जो एआई-आधारित मशीन विजन तकनीक का लाभ उठाते हैं। यह तकनीक ड्रोन को लक्ष्य की पहचान करने, उसे वर्गीकृत करने (जैसे- यह एक सैन्य ट्रक है) और स्वचालित रूप से पीछा करने में सक्षम बनाती है।

रूस का यह मानना है कि ये जटिल ज्यामितीय पैटर्न ड्रोन के एआई एल्गोरिदम को सिमेंटिक सेगमेंटेशन में कठिनाई पैदा करेंगे। इससे ड्रोन के लिए ट्रक के आकार को पहचानना और उसे एक स्थिर लक्ष्य के रूप में लॉक करना मुश्किल हो जाता है। यह नवाचार रूसी सेना की उस गहरी चिंता को उजागर करता है, जिसमें वे स्वायत्त और सटीक हमलों से अपनी रसद श्रृंखला को सुरक्षित रखने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह डैज़ल पेंट आधुनिक एआई के उन्नत सेंसरों को लंबे समय तक धोखा दे पाने में सफल हो पाता है या नहीं, क्योंकि ड्रोन प्रौद्योगिकियां भी उतनी ही तेजी से अपनी पहचान क्षमता को विकसित कर रही हैं।