Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
West Bengal News: बंगाल में 1 जून से महिलाओं को मिलेंगे ₹3000, शुभेंदु सरकार का 'अन्नपूर्णा भंडार' प... पीएम मोदी का वडोदरा से संबोधन: 'वर्क फ्रॉम होम' अपनाएं और सोने की खरीदारी टालें, जानें क्या है वजह Mira Bhayandar News: काशीमीरा में शिवाजी महाराज की प्रतिमा हटाने पर बवाल, सरनाईक और मेहता आमने-सामने BRICS Meeting Delhi: दिल्ली में जुटेगा BRICS, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर होगी चर्चा Rewa News: तिलक के दौरान दूल्हे के अफेयर का खुलासा, शादी से मना करने पर लड़की पक्ष को दौड़ा-दौड़कर प... Secunderabad News: बीटेक छात्र यवन की हत्या का खुलासा, लड़की के पिता-भाई समेत 10 आरोपी गिरफ्तार UP BJP Meeting Lucknow: 2027 चुनाव का रोडमैप तैयार करेगी BJP, लखनऊ में 98 जिलाध्यक्षों की बड़ी बैठक Katihar Crime News: कटिहार में मानवता शर्मसार, नाबालिगों को खूंटे से बांधकर पीटा, सिर मुंडवाकर जबरन ... Jamshedpur Triple Murder: जमशेदपुर में दिल दहला देने वाली वारदात, पिता ने पत्नी और दो बच्चों को उतार... मानव को अंगों को उगाने में मदद करेगा

अडानी के खिलाफ फैसला देने वाले जज का उसी दिन तबादला

सरकार पर हावी पूंजीवाद का एक और मामला सामने आया

राष्ट्रीय खबर

जयपुर: राजस्थान में एक न्यायिक फैसले और उसके तुरंत बाद हुए प्रशासनिक फेरबदल ने देश भर का ध्यान खींचा है। जयपुर कमर्शियल कोर्ट के न्यायाधीश दिनेश कुमार गुप्ता ने देश के एक बड़े औद्योगिक समूह, अडानी ग्रुप की कंपनी के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया। कोर्ट ने पाया कि अडानी के नेतृत्व वाली संयुक्त उद्यम कंपनी ने राजस्थान सरकार की एक सार्वजनिक इकाई की मिलीभगत से परिवहन शुल्क के नाम पर 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की है।

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब फैसले वाले दिन ही राज्य की भाजपा सरकार के कानून विभाग ने जज गुप्ता को पद से हटाने का आदेश जारी कर दिया। उसी शाम, राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश जारी कर जज दिनेश कुमार गुप्ता का तबादला जयपुर से 200 किलोमीटर दूर ब्यावर जिले में कर दिया।

इस त्वरित कार्रवाई ने न्यायिक हलकों में चर्चाओं और सवालों को जन्म दे दिया है। यह पूरा मामला 2007 में आवंटित छत्तीसगढ़ के हसदेव अरंड जंगलों के कोयला ब्लॉक से जुड़ा है। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड ने खनन के लिए अडानी ग्रुप के साथ एक जॉइंट वेंचर बनाया था।

मूल अनुबंध के अनुसार: अडानी की कंपनी को खदान से मुख्य रेलवे लाइन तक रेलवे साइडिंग (साइड ट्रैक) का निर्माण करना था ताकि कोयला सीधे ट्रेन से राजस्थान भेजा जा सके। कंपनी ने वर्षों तक यह रेलवे साइडिंग नहीं बनाई। परिणामस्वरूप, कोयले को खदान से रेलवे स्टेशन तक सड़क मार्ग (ट्रकों) से ले जाया गया, जिसका भारी खर्च राजस्थान की सरकारी कंपनी पर डाला गया।

जज दिनेश कुमार गुप्ता ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि रेलवे साइडिंग न बनाना कंपनी की अपनी विफलता थी, इसलिए सड़क परिवहन का खर्च भी उसी को वहन करना चाहिए था। इसके बजाय, कंपनी ने 1,400 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से वसूले। कोर्ट ने न केवल अडानी के नेतृत्व वाली कंपनी परसा केंटे कोलियरीज लिमिटेड पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, बल्कि केंद्र सरकार को इस पूरे सौदे के ऑडिट का निर्देश भी दिया। हालांकि, इस घटनाक्रम के दो हफ्ते बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने जज गुप्ता के आदेश पर रोक लगा दी। फिलहाल यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है और अगली सुनवाई जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में होनी है।