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संयुक्त अरब अमीरात में भारी बारिश और बाढ़

शुष्क मौसम के लिए परिचित अमीरात में मौसम का बदलाव

दुबईः संयुक्त अरब अमीरात के दो सबसे बड़े और आधुनिक शहर—दुबई और अबू धाबी—वर्तमान में प्रकृति के अभूतपूर्व प्रकोप का सामना कर रहे हैं। पिछले 24 घंटों में हुई मूसलाधार बारिश ने इन शहरों की चमक-धमक को पानी के नीचे छिपा दिया है। जो देश अपनी शुष्क जलवायु और चिलचिलाती धूप के लिए जाना जाता है, वहां इस तरह की अनपेक्षित और तीव्र वर्षा ने न केवल आम नागरिकों को, बल्कि मौसम वैज्ञानिकों को भी हैरत में डाल दिया है।

हवाई और सड़क यातायात पर संकट बारिश का सबसे बड़ा और तत्काल प्रभाव परिवहन क्षेत्र पर पड़ा है। दुनिया के व्यस्ततम हवाई अड्डों में से एक, दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे पर पानी भर जाने के कारण परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, केवल शुक्रवार (19 दिसंबर 2025) को ही अमीरात एयरलाइन ने अपनी 13 से अधिक उड़ानें रद्द की हैं, जबकि सैकड़ों अन्य विमानों को पड़ोसी देशों या अन्य सुरक्षित हवाई अड्डों पर डायवर्ट किया गया है।

सड़कों का हाल भी कम बुरा नहीं है; दुबई की प्रमुख धमनी मानी जाने वाली शेख जायद रोड के कई हिस्से तालाब में तब्दील हो गए हैं, जिससे हजारों वाहन घंटों फंसे रहे। रास अल खैमाह से एक दुखद समाचार भी आया है जहाँ भारी बारिश के कारण दीवार गिरने से एक भारतीय प्रवासी की मृत्यु हो गई।

प्रशासनिक कदम और वर्क फ्रॉम होम बिगड़ते हालात को देखते हुए दुबई और अबू धाबी की सरकारों ने तत्काल आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू कर दिया है। सभी सरकारी कर्मचारियों को घर से काम करने के निर्देश दिए गए हैं और निजी क्षेत्र से भी इसी का पालन करने की जोरदार अपील की गई है। स्कूलों को ऑनलाइन कक्षाओं पर शिफ्ट कर दिया गया है ताकि सड़कों पर भीड़ कम की जा सके और जल निकासी का काम तेजी से हो सके। दुबई नगर निगम ने अपनी चौबीस घंटे आपातकालीन टीमों को तैनात किया है, जो शक्तिशाली पंपों के जरिए सड़कों से पानी निकालने में जुटी हैं।

क्लाउड सीडिंग या जलवायु परिवर्तन? इस भारी बारिश के कारणों को लेकर विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) की तकनीक का परिणाम मान रहे हैं, जिसका उपयोग यूएई अक्सर जल संकट से निपटने के लिए करता है। हालांकि, मौसम विज्ञानियों का तर्क है कि अल बशायर नामक कम दबाव की प्रणाली और ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र के बढ़ते तापमान ने इस बारिश को इतना विनाशकारी बना दिया है।

गर्म हवा में नमी रोकने की क्षमता अधिक होती है, जिससे अब रेगिस्तानी इलाकों में भी क्लाउडबर्स्ट जैसी घटनाएं होने लगी हैं। यह आपदा एक चेतावनी है कि भविष्य के शहरी नियोजन में मरुस्थलीय शहरों को भी अब भारी बाढ़ से निपटने के लिए अत्याधुनिक ड्रेनेज सिस्टम की आवश्यकता होगी।