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ईरान युद्ध को जल्द समाप्त करना चाहते हैः ट्रंप

ईरान युद्ध पर अमेरिकी राष्ट्रपति का फिर नया बयान

  • अचानक प्राथमिकताएं बदली

  • सहयोगियों पर जिम्मेदारी की चाल

  • खजाना और हथियार दोनों खर्च हो रहे

वाशिंगटनः ईरान के साथ जारी युद्ध के पांचवें सप्ताह में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सैन्य रणनीति में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने करीबियों से कहा है कि वे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को समाप्त करने के पक्ष में हैं, भले ही सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से न खुले।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस रणनीतिक जलमार्ग को फिर से खोलने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल है और इसमें लंबा समय लग सकता है, जो ट्रंप के चार से छह सप्ताह के भीतर युद्ध खत्म करने के लक्ष्य में बाधा बन सकता है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने स्पष्ट किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना अब उन मुख्य उद्देश्यों (Core Objectives) में शामिल नहीं है, जो युद्ध समाप्ति के लिए निर्धारित किए गए हैं।

इसके बजाय, अब अमेरिका का पूरा ध्यान ईरान की नौसेना और मिसाइल भंडार को कमजोर करने पर है। वैसे  इस बात की भी चर्चा है कि इस युद्ध में अमेरिकी खजाने के तेजी से खाली होने से भी सरकार चिंतित हैं। दूसरी तरफ सैन्य प्रशासक अपने मिसाइल भंडार के कम होने पर चिंता जता चुके हैं।

एक तरफ ट्रंप युद्ध को जल्द समेटना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई जा रही है। हाल ही में यूएसएस त्रिपोली और 2,500 नौसैनिकों की तैनाती की गई है। साथ ही, 10,000 अतिरिक्त जमीनी सैनिकों को भेजने और ईरान के यूरेनियम भंडार को जब्त करने जैसे जटिल मिशनों पर भी विचार किया जा रहा है।

यदि कूटनीतिक दबाव के माध्यम से व्यापारिक मार्ग बहाल नहीं होता है, तो वाशिंगटन यूरोपीय और खाड़ी देशों के सहयोगियों से इस जलमार्ग को खोलने का नेतृत्व करने का आग्रह करेगा। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अल जजीरा से कहा कि यह जलमार्ग अंततः खुलेगा ही—या तो ईरान अंतरराष्ट्रीय कानूनों को मानकर इसे खोलेगा, या अमेरिका की भागीदारी के साथ वैश्विक देशों का गठबंधन इसे सुनिश्चित करेगा।

ईरान द्वारा इस जलमार्ग की नाकेबंदी से वैश्विक ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया है। हालांकि ईरान ने भारत जैसे मित्र देशों के जहाजों को जाने की अनुमति दी है, लेकिन अन्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा बरकरार है। ट्रंप के बयानों में इस मुद्दे पर विरोधाभास दिखता रहा है; कभी वे ईरानी तेल कुओं पर बमबारी की धमकी देते हैं, तो कभी इसे दूसरे देशों की समस्या बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं।