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अमेरिकी राष्ट्रपति अब ईरान पर सैनिक उतारने की तैयारी में

हर खून की अपनी कीमत होती हैः मोजतबा खामेइनी

  • अमेरिका पर आर्थिक दबाव अधिक है

  • उम्मीद से अधिक प्रतिरोध है ईरान का

  • पूरी दुनिया के तेल बाजार में उछाल जारी

तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध अपने तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। पेंटागन द्वारा ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम के इस सैन्य अभियान के तहत अब तक ईरानी ठिकानों पर 7,800 से अधिक हवाई हमले किए जा चुके हैं। अब ताजा रिपोर्ट्स संकेत दे रही हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हवाई और मिसाइल हमलों से आगे बढ़कर जमीनी कार्रवाई की योजना बना रहे हैं।

ट्रम्प प्रशासन मध्य पूर्व में हजारों अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती पर विचार कर रहा है। सैन्य रणनीतिकारों के बीच जिन विकल्पों पर चर्चा हो रही है, उनमें ईरान के 90 फीसद तेल निर्यात का केंद्र होने के कारण, अमेरिका इस द्वीप पर कब्जा करने या इसे सुरक्षित करने का विकल्प देख रहा है।ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार को जब्त करने के लिए विशेष बलों की तैनाती पर चर्चा हुई है। तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान की तटरेखा पर सैनिकों की तैनाती की जा सकती है।

दूसरी तरफ ईरान के नये सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने बुधवार को एक कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी की हत्या पर शोक व्यक्त करते हुए अमेरिका और इजरायल को चेतावनी दी।

खामेनेई ने कहा, अपराधी हत्यारों को जल्द ही लारीजानी की शहादत की कीमत चुकानी होगी। बता दें कि अली लारीजानी हाल ही में तेहरान के बाहरी इलाके में एक सटीक सर्जिकल स्ट्राइक में मारे गए थे, जिसे इजरायली वायुसेना ने अंजाम दिया था। अब तक इस संघर्ष में 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और लगभग 200 घायल हुए हैं। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ईरान की नौसेना को भारी नुकसान पहुँचाया गया है, जिसमें 120 से अधिक जहाज नष्ट होने का दावा किया गया है। इस युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची है और तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।

हालाँकि ट्रम्प ने हमेशा अंतहीन युद्धों को समाप्त करने की बात कही है, लेकिन इस बार वह ईरान के खतरे को हमेशा के लिए खत्म करने का तर्क दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी सेना भेजना एक बड़ा जोखिम हो सकता है, जिससे अमेरिका एक लंबे और खर्चीले युद्ध में फंस सकता है।