वीडियो वायरल होने के बाद रेलवे की सफाई
राष्ट्रीय खबर
चंडीगढ़ः हरियाणा के जींद और सोनीपत रेल खंड के बीच हाल ही में शुरू की गई भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को लेकर सोशल मीडिया पर जारी दावों पर भारतीय रेलवे ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। दरअसल, इंटरनेट पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा था, जिसमें आरोप लगाया गया कि हाइड्रोजन इंजन में तकनीकी खराबी आने की वजह से ट्रेन को डीजल इंजन के सहारे खींचा जा रहा है। उत्तर रेलवे ने इन आरोपों का खंडन करते हुए वायरल वीडियो को पूरी तरह भ्रामक, तथ्यहीन और भ्रामक प्रचार का हिस्सा करार दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 जुलाई को हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई यह 10-कार हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेन उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन के अंतर्गत आने वाले 89 किलोमीटर लंबे समर्पित जींद-सोनीपत रूट पर सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और सुरक्षा मानकों के तहत किसी भी ट्रेन को मेंटेनेंस शेड तक ले जाने और वापस लाने के लिए दूसरे लोकोमोटिव का उपयोग करना एक बेहद सामान्य व अनिवार्य प्रक्रिया है।
रेलवे बोर्ड के 22 मई 2026 के आधिकारिक पत्र का विवरण देते हुए अधिकारियों ने बताया कि इस हाइड्रोजन ट्रेनसेट के व्यावसायिक संचालन की मंजूरी सिर्फ जींद-सोनीपत रूट के लिए मिली है, जबकि इसके शेड्यूल्ड मेंटेनेंस और ओवरहाउलिंग की व्यवस्था दिल्ली स्थित शकूरबस्ती वर्कशॉप में रखी गई है। नियमों के मुताबिक, जींद से शकूरबस्ती और वापसी के यात्रा काल में ट्रेनसेट को डेड कंडीशन में ही किसी अन्य कार्यशील इंजन से खींचकर ले जाना कानूनी रूप से जरूरी है। रेलवे ने नागरिकों से सोशल मीडिया की अफवाहों से बचने का अनुरोध करते हुए आश्वस्त किया है कि हाइड्रोजन ट्रेन तकनीकी रूप से पूरी तरह सुरक्षित है और इसका संचालन समय सारिणी के अनुसार सुचारू रूप से चल रहा है।