बैठक का विवरण अंत में बदला गया है
ओबीसी सूची पर विवाद स्पष्ट हुआ
बैठक की कार्यवाही से सूचना गायब
अभी जनगणना में कॉलम नहीं है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः 2027 की जनगणना में जाति की गिनती राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। सरकार ने पहले से तय विकल्पों की जगह ओपन-एंडेड प्रश्न प्रारूप को चुना है, जिसकी लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेताओं ने आलोचना की है।
इस प्रक्रिया में लगी सरकार की दो प्रमुख एजेंसियों—भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय—के बीच मतभेद सामने आए हैं। 1 जून की एक बैठक में मंत्रालय ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा बनाए गए ओबीसी की सूची साझा करने की इच्छा जताई थी। हालांकि, महारजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा तैयार शुरुआती कार्यवृत्त में यह बात सही तरीके से दर्ज नहीं हुई।
8 जून को जारी शुरुआती नोट में लिखा गया था कि मंत्रालय के पास कोई आधिकारिक जाति सूची नहीं है, जिससे पहले से तय सूची के आधार पर गणना संभव नहीं होगी। मंत्रालय के अधिकारियों ने इसे जिम्मेदारी दूसरों पर डालने की कोशिश माना और 11 जून को संशोधित नोट भेजा। इसमें स्पष्ट किया गया कि संविधान के तहत केवल अनुसूचित जाति (1,258 प्रविष्टियां) और अन्य पिछड़ा वर्ग (2,483 प्रविष्टियां) की सूचियां रखी जाती हैं, जिन्हें उपलब्ध कराया जा सकता है। 30 जून को इस संशोधित नोट को स्वीकार कर लिया गया।
सरकार का मानना है कि ओपन-एंडेड प्रश्न ही एकमात्र तरीका है जिससे राज्य खुद जाति पहचान का निर्धारक न बने। हालांकि, इससे 2011 के सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना जैसी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं, जहां 46.7 लाख से अधिक अलग-अलग जातियों के नाम दर्ज हो गए थे और जातिगत आंकड़ों का वर्गीकरण जटिल हो गया था।