एमएमडीआर बिल पर जनता का गुस्सा बढ़ रहा
छात्र आंदोलन का मुद्दा हवा हो गया
स्थानीय सवालों से भाग रहे हैं नेता
झामुमो और कांग्रेस हमलावर है इसमें
राष्ट्रीय खबर
रांचीः झारखंड प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के नेता अजीब पशोपेश में फंसे हैं। दरअसल केंद्र स्तर पर यह नया प्रावधान लागू किये जाने के बाद से खनिज प्रदेश में इसका विरोध हो रही है। जहां जहां भाजपा की सरकारें नहीं हैं, वहां यह विरोध मुखर है जबकि भाजपा शासित राज्यों में विरोधी दल यह मुद्दा उठा रहे हैं। इस विवाद को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि यह विधेयक राज्यों को खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने से प्रतिबंधित करता है, जिससे राज्य सूची की प्रविष्टि 49 (भूमि और भवनों पर कर) तथा प्रविष्टि 50 (खनिज अधिकारों पर कर) के अंतर्गत राज्यों की शक्तियों के अतिक्रमण को लेकर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं। यद्यपि संसद को प्रविष्टि 50 के अंतर्गत खनिज अधिकारों पर राज्य कराधान को सीमित करने की शक्ति प्राप्त है, लेकिन प्रविष्टि 49 के अंतर्गत भूमि पर कराधान को सीमित करने की उसकी शक्ति पर प्रश्न उठते हैं।

संभवतः सर्वोच्च न्यायालय के 2024 के निर्णय के साथ टकराव: जुलाई 2024 में, सर्वोच्च न्यायालय के 9-न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा 8:1 बहुमत से दिये गए निर्णय में, खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकरण बनाम स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया में राज्यों की खनिज अधिकारों पर कर लगाने की विधायी क्षमता को मान्यता दी गई, जो राज्य सूची के प्रविष्टि 50 और खनिज-धारक भूमि के लिये प्रविष्टि 49 के अंतर्गत है। न्यायालय ने राज्यों को 1 अप्रैल, 2005 से पूर्वव्यापी रूप से लंबित कर बकाया वसूलने की भी अनुमति दी।
अब राज्य पर पड़ने वाले इसके प्रभाव को समझते हुए भी झारखंड भाजपा को इसके समर्थन में खड़ा रहना पड़ रहा है। दूसरी तरफ भाजपा की इस कमजोरी को भांपते हुए झामुमो और कांग्रेस ने इस पर दबाव बढ़ा दिया है। इस मुद्दे पर विरोधियों द्वारा उठाये गये सवालों से भाजपा के नेता या तो कन्नी काट रहे हैं अथवा वही उत्तर दे रहे हैं, जो केंद्र सरकार का बयान है। इस बीच केंद्र से पिछले कई महीनों से राज्य सरकार को कोई पैसा नहीं मिलने का मुद्दा भी फंस गया है। छात्र आंदोलन पर अपनी पकड़ मजबूत करने की भाजपा की चाल फुस्स हो गयी क्योंकि यह मामला ही अब खत्म हो गया है। लिहाजा एमएमडीआर पर विरोधियों के लगातार आरोपों के बदले उनका मुंहतोड़ उत्तर देना फिलहाल भाजपा नेताओँ के बूते के बाहर की चीज है। इसलिए वे इस राजनीतिक चक्की के दो पाटों के बीच पिसे जा रहे हैं।