मॉनसून सत्र प्रारंभ होने से ठीक पहले आया फैसला
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः संसद के मानसून सत्र के शुरू होने से ठीक पहले, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों का एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में विलय को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के सदस्यों की संख्या घटकर मात्र 3 रह गई है, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।
लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी एक आधिकारिक परिपत्र के अनुसार, शिवसेना के संसदीय दल के नेता श्रीकांत शिंदे के तहत अब कुल 13 सांसद हैं। विलय की मांग करने वाले छह सांसद—नागेश पाटिल आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय दीना पाटिल, भाऊसाहेब वाकचौरे, ओमराजे निंबालकर और संजय बंडू जाधव थे। इन सांसदों ने अपने संसदीय क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए सत्तारूढ़ गुट के साथ जाने का निर्णय लिया। चूंकि छह सांसद दल के दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े को पूरा करते हैं, इसलिए यह विलय दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से सुरक्षित माना जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस में भी बड़ा विभाजन देखने को मिला है। टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल होकर एक अलग गुट बना लिया है। हालांकि स्पीकर ओम बिरला ने इन 20 बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति दे दी है, लेकिन एनसीपीआई में उनके विलय की औपचारिक मान्यता की अर्जी अभी विचाराधीन है। इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मानसून सत्र की रणनीति पर चर्चा के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में बागी टीएमसी नेताओं—सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार को भी आमंत्रित किया। सुदीप बंद्योपाध्याय ने बैठक में भाग लेकर यह स्पष्ट किया कि उनका नया दल धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रीय एकता के सिद्धांतों पर कायम रहेगा। मानसून सत्र में विपक्षी दलों के इस विभाजन के बाद सत्तारूढ़ एनडीए की स्थिति संसद में और मजबूत होती दिख रही है।