सीरिया के नये प्रस्ताव पर पूरी दुनिया का ध्यान आकृष्ट हुआ
होर्मुज में पार होना अत्यंत कठिन है
युद्ध की वजह से विकल्पों की तलाश
सीरिया की भौगोलिक स्थिति मददगार
अल-कर्यातैनः दिन-रात, फ़ारस की खाड़ी से तेल ले जाने वाले 5,000 विशाल ट्रक बंजर रेगिस्तान के इस इलाके से इस तरह गरजते हुए गुजरते हैं मानो भूमध्य सागर की ओर सांप की तरह बढ़ता हुआ कोई काफ़िला हो। इन ट्रकों ने अप्रैल में दक्षिणी इराक की रिफाइनरियों और सीरियाई बंदरगाह बानियास के बीच आवाजाही शुरू की थी। शुरुआत में यह इराकी तेल निर्यातकों द्वारा किया गया एक प्रयोग था, जो ईरान के साथ अमरीका-इज़राइल युद्ध के बाद उस जलमार्ग में मालवाहक जहाजों की आवाजाही रुक जाने के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य से बचने का रास्ता तलाश रहे थे।
फ़ारस की खाड़ी में जारी सैन्य तनाव और जलमार्गों में सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए यह नया मार्ग अत्यंत रणनीतिक महत्व हासिल कर चुका है। इराक और अन्य खाड़ी देश अपने बहुमूल्य ऊर्जा संसाधनों को सुरक्षित रूप से यूरोपीय और वैश्विक बाजारों तक पहुँचाने के लिए वैकल्पिक जमीनी रास्तों पर निर्भरता बढ़ा रहे हैं।
सीरिया की भौगोलिक स्थिति इसे मध्य पूर्व के मुख्य परिवहन और ऊर्जा पारगमन केंद्र (ट्रांजिट हब) के रूप में स्थापित करने का एक बड़ा अवसर प्रदान करती है। बानियास बंदरगाह तक पहुँचने वाला यह तेल सीधे भूमध्य सागर के जहाजों पर लोड होकर आगे रवाना किया जा सकता है, जिससे होर्मुज़ के जोखिम भरे समुद्री रास्ते की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
हालाँकि, हजारों भारी ट्रकों का रेगिस्तानी रास्तों से लगातार गुजरना बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव डाल रहा है और रसद प्रबंधन (लॉजिस्टिक्स) की नई चुनौतियाँ खड़ी कर रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार को सुचारू बनाए रखने के लिए इसे एक कारगर अल्पकालिक समाधान माना जा रहा है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में पाइपलाइनों के पुनरुद्धार और स्थायी बुनियादी ढांचे के विकास का मार्ग प्रशस्त हो सकता है, जिससे सीरिया की आर्थिक और भू-राजनीतिक स्थिति मजबूत होगी।