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मंत्रियों की मीटिंग से प्रश्नकाल जरूरीः ओम बिड़ला

पहली बार सत्ता पक्ष पर नाराजगी जतायी स्पीकर ने

  • सदन में खाली दिखी मंत्री की कुर्सी

  • मंत्रियों से समझदारी की उम्मीद है

  • भविष्य में ऐसा नहीं होने का निर्देश

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः लोक सभा की कार्यवाही के दौरान बुधवार को एक दिलचस्प और गंभीर स्थिति तब देखने को मिली जब लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में एक वरिष्ठ मंत्री की अनुपस्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सदन का प्रश्नकाल किसी भी अन्य प्रशासनिक मीटिंग से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

बुधवार को जब प्रश्नकाल के दौरान एक विशिष्ट मंत्रालय से संबंधित सवाल पूछे जा रहे थे, तब संबंधित वरिष्ठ मंत्री सदन में मौजूद नहीं थे। इस पर विपक्षी सदस्यों और खुद अध्यक्ष ने संज्ञान लिया। जब सदन को सूचित किया गया कि मंत्री किसी महत्वपूर्ण आधिकारिक बैठक में व्यस्त हैं, तो अध्यक्ष ओम बिरला ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया।

ओम बिरला ने संसदीय परंपराओं की याद दिलाते हुए कहा, मंत्रियों को यह समझना चाहिए कि प्रश्नकाल संसद की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यहाँ जनता के प्रतिनिधियों के सवालों का जवाब देना उनकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। कोई भी मीटिंग सदन की कार्यवाही से बड़ी नहीं हो सकती।

उन्होंने निर्देश दिया कि भविष्य में यह सुनिश्चित किया जाए कि जब किसी मंत्रालय से जुड़े सवाल लगे हों, तो संबंधित मंत्री स्वयं सदन में उपस्थित रहें, न कि इसे केवल राज्य मंत्रियों के भरोसे छोड़ें। ओम बिरला अपने कार्यकाल के दौरान सदन की उत्पादकता और अनुशासन को लेकर काफी मुखर रहे हैं। इससे पहले भी वह कई बार मंत्रियों और सांसदों को सदन के नियमों और समय की पाबंदी का पालन करने की हिदायत दे चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अध्यक्ष का यह रुख संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।