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वैश्विक चिप निर्माण में भारत की बढ़ती धमकः  मोदी

गुजरात के साणंद में केन्स सेमीकॉन प्लांट का शुभारंभ

  • सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में देश की तरक्की

  • हर कुछ हमारा आत्मविश्वास दर्शाता है

  • मेक इन इंडिया से मेक फॉर द वर्ल्ड

राष्ट्रीय खबर

अहमदाबादः गुजरात के साणंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3300 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित केन्स सेमीकॉन प्लांट का उद्घाटन कर भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को एक नई ऊंचाई दी है। 31 मार्च 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने न केवल इस आधुनिक इकाई को राष्ट्र को समर्पित किया, बल्कि इसे इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन की सफलता का एक जीवंत प्रमाण बताया।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विकास की तीव्र रफ्तार को रेखांकित करते हुए कहा कि एक माह पूर्व ही माइक्रॉन के प्लांट में उत्पादन शुरू हुआ था और आज केन्स टेक्नोलॉजी का प्लांट भी परिचालन में आ गया है। उन्होंने इसे महज इत्तेफाक न मानकर भारत के विकसित होते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की ताकत करार दिया। 2021 में शुरू किया गया इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन अब धरातल पर परिणाम दिखाने लगा है, जो वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते आत्मविश्वास का परिचायक है।

केन्स टेक्नोलॉजी, जो एक पूर्णतः भारतीय कंपनी है, अब वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि साणंद में निर्मित एडवांस्ड इंटेलिजेंट पावर मॉड्यूल का पहला बड़ा बैच निर्यात के लिए पहले ही बुक किया जा चुका है। ये मॉड्यूल अमेरिकी कंपनियों को सप्लाई किए जाएंगे, जो वैश्विक उद्योगों को ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होंगे। यह उपलब्धि दर्शाती है कि मेक इन इंडिया अब मेक फॉर द वर्ल्ड के मंत्र के साथ विश्व के हर कोने में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सरकार ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन पर भी जोर दिया है। इसके अंतर्गत खनन, उत्पादन और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) के लिए 1500 करोड़ रुपये की योजना शुरू की गई है। साथ ही, तटीय राज्यों जैसे ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल को जोड़कर एक रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने की घोषणा की गई है। यह कॉरिडोर खनन से लेकर निर्माण तक की एक सशक्त एकीकृत श्रृंखला तैयार करेगा।

प्रधानमंत्री ने खेद जताते हुए कहा कि यदि ये प्रयास 30-40 साल पहले शुरू हुए होते, तो आज भारत कहीं आगे होता। हालांकि, अब देश खनिज संपदा का नेशनल रिजर्व बनाने की दिशा में मिशन मोड में कार्य कर रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां तकनीकी रूप से पूरी तरह सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन सकें।