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सेमीकंडक्टर आपूर्ति में व्यवधान से निक्केई में भारी गिरावट

दक्षिण कोरिया की कंपनी में खराबी का असर जापान में

टोक्योः एशियाई वित्तीय बाजारों में उस समय हड़कंप मच गया जब जापान का प्रमुख शेयर सूचकांक निक्केई 225 कारोबार की शुरुआत में ही 2.5 फीसद लुढ़क गया। इस गिरावट ने न केवल जापानी निवेशकों को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक विश्वास को हिलाकर रख दिया है। इस बाजार अस्थिरता के केंद्र में वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में आया एक नया और अप्रत्याशित व्यवधान है।

पिछले कुछ घंटों में ताइवान की दिग्गज कंपनी टीएसएमसी और दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी चिप निर्माता कंपनियों से आई खबरों ने आग में घी का काम किया है। इन कंपनियों ने उत्पादन लाइनों में गंभीर तकनीकी खराबी और सिलिकॉन वेफर्स जैसे आवश्यक कच्चे माल की कमी के कारण उत्पादन में देरी की आधिकारिक घोषणा की है। चूंकि आधुनिक अर्थव्यवस्था पूरी तरह से इन सूक्ष्म चिप्स पर टिकी है, इसलिए आपूर्ति में जरा सी भी बाधा वैश्विक स्तर पर डोमिनो इफेक्ट (एक के बाद एक गिरावट) पैदा करती है।

जापान, जिसकी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा ऑटोमोबाइल और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स पर आधारित है, इस व्यवधान से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। इन उद्योगों के लिए सेमीकंडक्टर आधुनिक युग का तेल माने जाते हैं। दुनिया की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई, क्योंकि चिप्स की कमी का सीधा मतलब उत्पादन बंद होना और डिलीवरी में देरी है। सोनी, गेमिंग कंसोल और सेंसर बनाने वाली इस कंपनी पर भी निवेशकों का भरोसा डगमगाया है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्टफोन्स और विशेष रूप से ए आई सर्वर की कीमतों में भारी उछाल आना तय है, जिससे उपभोक्ता की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

टोक्यो के बाजार विशेषज्ञों का तर्क है कि यह केवल एक अस्थायी सुधार नहीं है। यह बढ़ती उत्पादन लागत और वैश्विक मुद्रास्फीति के दबाव के बीच एक व्यापक आर्थिक मंदी का प्रारंभिक संकेत हो सकता है। बढ़ती लागत और घटती आपूर्ति का यह मेल स्टैगफ्लेशन जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, जापानी सरकार ने वित्तीय नियामकों और केंद्रीय बैंक के अधिकारियों की एक आपात बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बाजार की तरलता बनाए रखना और इस बात की समीक्षा करना है कि क्या घरेलू उद्योगों को विशेष राहत पैकेज की आवश्यकता है।