पेरिस में यूरोपीय संघ की आपात बैठक से निकली बात
पेरिस: फ्रांस की राजधानी पेरिस में आज यूरोपीय संघ के पर्यावरण और कृषि मंत्रियों की एक असाधारण बैठक शुरू हुई है। यह उच्च-स्तरीय सत्र उन चौंकाने वाले वैज्ञानिक आंकड़ों के बाद बुलाया गया है, जो संकेत दे रहे हैं कि यूरोप 2026 की शुरुआत में ही अभूतपूर्व सूखे और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की चपेट में है।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, फ्रांस, स्पेन और इटली के अधिकांश हिस्सों में सर्दियों के दौरान होने वाली सामान्य बारिश में 40 प्रतिशत तक की भारी कमी दर्ज की गई है। यह स्थिति न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से चिंताजनक है, बल्कि यह आगामी गर्मियों में एक भयावह जल संकट की चेतावनी भी दे रही है।
यूरोपीय जलवायु एजेंसी के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि यदि अगले साठ दिनों (दो महीनों) में पर्याप्त वर्षा नहीं होती है, तो यूरोप की जीवनरेखा मानी जाने वाली प्रमुख नदियाँ—राइन और डेन्यूब का जलस्तर इतना गिर सकता है कि उनमें व्यापारिक जहाजों का आवागमन पूरी तरह ठप हो जाएगा। यह स्थिति यूरोप के लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन के लिए विनाशकारी साबित होगी।
पेरिस में हो रही इस बैठक का मुख्य उद्देश्य एक साझा जल प्रोटोकॉल विकसित करना है। इसमें प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की जा रही है। सदस्य देशों में जल के सीमित उपयोग को लागू करने के लिए एक रूपरेखा तैयार करना। सूखे से प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता देने के लिए एक विशेष कृषि राहत कोष का निर्माण। विभिन्न देशों के बीच जल संसाधनों के साझा प्रबंधन के लिए डेटा साझा करने की तकनीक विकसित करना ताकि भविष्य में होने वाली फसल क्षति को न्यूनतम किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक मौसमी घटना नहीं है, बल्कि यह यूरोप की दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए एक गंभीर चुनौती है। मंत्रियों का प्रयास है कि सदस्य देश आपसी सहयोग से न केवल तत्काल पानी की कमी से निपटें, बल्कि कृषि के उन तरीकों को अपनाएं जो कम पानी में भी उच्च उपज देने में सक्षम हों।