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दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की सदन में गैरहाजिरी का रिकार्ड

केसीआर ने करोड़ रुपया वेतन ले लियाः रेवंत रेड्डी

राष्ट्रीय खबर

हैदराबादः आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की राजनीति में एक अजीबोगरीब परिपाटी देखने को मिल रही है, जहाँ प्रमुख विपक्षी नेता सदन की कार्यवाही से दूरी बनाए हुए हैं। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी और तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के संदर्भ में यह बात चर्चा का विषय बनी हुई है।

इन दोनों नेताओं ने विधानसभा सत्रों में शामिल होने के बजाय केवल अपनी सदस्यता बचाने के उद्देश्य से साल में एक या दो बार सदन में उपस्थिति दर्ज कराने को अपनी आदत बना लिया है। यह गंभीर मुद्दा आज तेलंगाना विधानसभा में उस समय गरमा गया जब मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने इस पर खुली चर्चा का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने सदन के समक्ष यह मौलिक प्रश्न रखा कि क्या उन विधायकों को सरकारी खजाने से वेतन और भत्ते मिलना जारी रहना चाहिए, जो सत्रों में भाग ही नहीं लेते। रेवंत रेड्डी ने कड़े लहजे में लोकतांत्रिक मूल्यों और नैतिकता की दुहाई देते हुए इस पर विचार करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से केसीआर का उल्लेख करते हुए कुछ चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि 2023 के विधानसभा चुनाव में हारने के बाद से केसीआर ने एक बार भी सदन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से हिस्सा नहीं लिया है। इसके बावजूद, उन्हें वेतन और अन्य सुविधाओं के रूप में अब तक कुल 1.06 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है।

रेवंत रेड्डी ने केसीआर की राजनीतिक गरिमा पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक जनप्रतिनिधि के रूप में यह अत्यंत शोचनीय है कि वे जनता की आवाज़ उठाने के लिए विधानसभा नहीं आ रहे हैं, लेकिन हर महीने अपना वेतन स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब कोई विधायक अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहता है, तो उसे मिलने वाले वित्तीय लाभों पर रोक लगनी चाहिए। सदन में इस विषय पर हुई चर्चा ने अब तेलंगाना की राजनीति में नैतिकता बनाम कानूनी अधिकारों की एक नई बहस छेड़ दी है।