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ईडी को अनुमति देना संघीय ढांचे को चुनौती

आई पैक मामले में देश की शीर्ष अदालत में सुनवाई जारी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः पश्चिम बंगाल राज्य ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर रिट याचिका की विचारणीयता पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। राज्य सरकार का मुख्य तर्क यह है कि प्रवर्तन निदेशालय जैसी एजेंसी के पास वह कानूनी व्यक्तित्व नहीं है जो किसी राज्य के विरुद्ध मौलिक अधिकारों के क्षेत्राधिकार का उपयोग करने के लिए आवश्यक होता है।

राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने दलील दी कि प्रवर्तन निदेशालय का कोई स्वतंत्र विधिक अस्तित्व नहीं है, क्योंकि यह केवल केंद्र सरकार का एक विभाग मात्र है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार के एक विभाग को राज्य सरकार के खिलाफ रिट याचिका दायर करने की अनुमति दी जाती है, तो यह भारत के संघीय ढांचे के लिए अत्यंत खतरनाक साबित होगा। यह मामला केंद्र-राज्य संबंधों की संवैधानिक मर्यादाओं से जुड़ा है।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्र और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि 8 जनवरी को कोलकाता में राजनीतिक परामर्शदाता फर्म आई-पैक के कार्यालय पर छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल के अधिकारियों ने बाधा उत्पन्न की थी। यह छापेमारी कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में की गई थी।

ईडी ने इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उन राज्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई की प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है, जिन्होंने कथित तौर पर छापेमारी में रुकावट डाली थी। इसके साथ ही एक अन्य संबंधित रिट याचिका भी है, जिसमें ईडी के अधिकारियों ने उन एफआईआर को चुनौती दी है जो पश्चिम बंगाल पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज की थीं। यह कानूनी संघर्ष अब देश की सर्वोच्च अदालत में संघीय शक्तियों और एजेंसी के अधिकारों के बीच एक महत्वपूर्ण परीक्षण बन गया है।