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हिरासत के लिए मुआवजे दे सरकारः बेबी

सोनम वांगचुक की रिहाई का स्वागत किया माकपा ने

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने बुधवार को प्रसिद्ध शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई का स्वागत करते हुए केंद्र सरकार से उन्हें मुआवजा राहत देने की मांग की है। इसके साथ ही पार्टी ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून जैसे दमनकारी कानूनों के प्रति अपने विरोध को एक बार फिर दोहराया है, जिसके तहत वांगचुक को हिरासत में लिया गया था।

माकपा के पोलित ब्यूरो सदस्य और पूर्व मंत्री एम.ए. बेबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स  पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा कि भले ही सरकार ने हिरासत के आदेश को वापस ले लिया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के लिए वांगचुक की हिरासत की वैधता पर निर्णय देना अनिवार्य है। उन्होंने तर्क दिया कि केवल आदेश रद्द कर देने से गृह मंत्रालय अपनी कानूनी जवाबदेही से बच नहीं सकता। बेबी ने मांग की कि न्यायालय इस अवैध हिरासत को रद्द करे और पीड़ित को उचित मुआवजा प्रदान करे।

वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रहा है। याचिका में तर्क दिया गया है कि शिक्षा, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण में दशकों तक राष्ट्र निर्माण का कार्य करने वाले व्यक्ति को एनएसए के तहत निशाना बनाना पूरी तरह से हास्यास्पद और मनमाना है। माकपा का मानना है कि सरकार अदालती जांच से बचने के लिए अंतिम समय पर आदेश वापस लेने की रणनीति अपना रही है, जिसे अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

माकपा ने हमेशा की तरह एनएसए जैसे कानूनों को काला कानून बताते हुए आरोप लगाया कि इनका उपयोग असहमति की आवाज को दबाने और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। पार्टी ने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि वह लद्दाख की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को दबाने के बजाय वांगचुक और प्रदर्शनकारी समिति के साथ तुरंत बातचीत शुरू करे।

गौरतलब है कि 59 वर्षीय सोनम वांगचुक को पिछले साल 26 सितंबर को लद्दाख में विरोध प्रदर्शनों के हिंसक होने के बाद हिरासत में लिया गया था। उन्हें शनिवार को जोधपुर सेंट्रल जेल से तब रिहा किया गया जब केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से हिरासत आदेश वापस ले लिया। हालांकि, मामला अभी भी शीर्ष अदालत में लंबित है जहाँ उनकी हिरासत की कानूनी वैधता को चुनौती दी गई है।