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आयोग ने ग्यारह डीएम का तबादला किया

राज्य सरकार और चुनाव आयोग का टकराव और बढ़ा

  • निष्पक्ष चुनाव की दलील दी गयी

  • पक्षपात का संदेह व्यक्त किया गया

  • टीएमसी ने कहा पक्षपात हो रहा है

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल किया है। चुनाव आयोग ने राज्य के 11 जिलाधिकारियों और कोलकाता के जिला चुनाव अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया है।

इसे बंगाल के शीर्ष नौकरशाही ढांचे में एक बड़ी सफाई के तौर पर देखा जा रहा है।सूत्रों के अनुसार, 8 से 10 मार्च के बीच राज्य प्रशासन की चुनावी तैयारियों की समीक्षा के दौरान चुनाव आयोग ने पाया कि ये अधिकारी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने में विफल रहे थे। एक वरिष्ठ नौकरशाह के मुताबिक, राज्य के लगभग आधे जिलों के जिलाधिकारियों को एक झटके में बदलना अभूतपूर्व है। इससे पहले आयोग मुख्य सचिव और गृह सचिव का भी तबादला कर चुका है।

चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर गुरुवार दोपहर तक 11 नए आईएएस अधिकारियों को डीएम नियुक्त करने का निर्देश दिया है। जिन जिलों के मजिस्ट्रेट बदले गए हैं, उनमें शामिल हैं। उत्तर बंगाल: कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, उत्तर दिनाजपुर, दार्जीलिंग और अलीपुरद्वार।

दक्षिण बंगाल: मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, पूर्व बर्धमान, उत्तर 24-परगना और दक्षिण 24-परगना। इसके अलावा, कोलकाता नगर निगम की आयुक्त अंशुला गुप्ता की जगह 2005 बैच की आईएएस अधिकारी स्मिता पांडेय को नियुक्त किया गया है। स्मिता पांडेय उत्तर कोलकाता के लिए जिला चुनाव अधिकारी के रूप में कार्य करेंगी।

आयोग की इस सख्त कार्रवाई के पीछे कई गंभीर कारण बताए जा रहे हैं।कई जिलाधिकारियों को मतदाता सूची के सफल क्रियान्वयन में ढिलाई बरतने और संदिग्ध दस्तावेज अपलोड करने के लिए पहले ही चेतावनी दी गई थी।

आयोग को लगा कि ये अधिकारी निष्पक्ष रूप से कार्य नहीं कर रहे थे। विशेष रूप से मुर्शिदाबाद और अलीपुरद्वार के जिलाधिकारियों की हालिया नियुक्तियों को आयोग ने संदेह की दृष्टि से देखा। ईमानदार अधिकारियों को वरीयता: नई नियुक्तियों में उन अधिकारियों को प्राथमिकता दी गई है जिन्हें राज्य सरकार ने पहले कम महत्वपूर्ण पदों पर भेज दिया था। इस प्रशासनिक फेरबदल ने बंगाल की राजनीति में उबाल ला दिया है:

तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर रही है क्योंकि वह लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव नहीं जीत सकती। भाजपा प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में बंगाल में प्रशासन और सत्ताधारी दल के बीच का अंतर खत्म हो गया था, इसलिए निष्पक्षता के लिए यह तबादले जरूरी थे। माकपा के सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि केवल अधिकारियों के तबादले से निष्पक्ष चुनाव की गारंटी नहीं दी जा सकती, हालांकि उन्होंने प्रशासन के राजनीतिकरण की आलोचना की। चुनाव आयोग का यह संदेश स्पष्ट है कि वह बंगाल में चुनावी प्रक्रिया की शुचिता से कोई समझौता नहीं करेगा।